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केजरीवाल सरकार दिल्ली पर पास नए क़ानून को लेकर अब क्या करेगी?
भारत की संसद में बुधवार को दिल्ली पर एक संशोधन बिल पास हुआ है. दिल्ली की सत्ता पर काबिज़ आम आदमी पार्टी का आरोप है कि इस नए संशोधन बिल के बाद दिल्ली सरकार का मतलब होगा सिर्फ़ 'उप-राज्यपाल', चुनी हुई सरकार नहीं.
इस बिल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष एक बार फिर आमने सामने हैं. दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के साथ इस मुद्दे पर विपक्ष की 10 से ज़्यादा पार्टियां साथ थीं. लेकिन बिल को राज्यसभा में रोका नहीं जा सका.
बिल क्या है? इसका दिल्ली वालों पर क्या असर होगा? इसकी चर्चा से पहले दिल्ली से जुड़ी कुछ बुनियादी बातें हैं, जो जानना ज़रूरी है.
दिल्ली क्या कभी राज्य था?
अब जब दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार 'दिल्ली का बॉस कौन' के सवाल पर आपस में लड़ रहे हैं, तो ये और भी ज़रूरी हो जाता है कि दिल्ली के इतिहास को समझ लिया जाए.
बात साल 1952 की है, जब दिल्ली एक राज्य था. उसी साल 48 विधानसभा सीटों के लिए यहाँ चुनाव हुए. उसके बाद साल 1956 में इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया.
फिर साल 1991 में कुछ और बदलाव हुए और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा तो नहीं मिला, लेकिन एक विशेष दर्जा मिला.
भारत के संविधान में 69वाँ संशोधन हुआ और दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा मिला. इसके लिए जीएनसीटीडी एक्ट (GNCTD) 1991 बना.
इसके लिए संविधान में धारा 239 A A को जोड़ा गया, जिसमें यहाँ सरकार कैसे चलेगी, इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी गई.
ये है दिल्ली के राज्य से केंद्र शासित प्रदेश और उसके बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बनने की छोटी सी कहानी.
संसद में इस बार नया क्या हुआ?
साल 1991 से लेकर 2013 तक कुछ मौक़ों को छोड़ कर कमोबेश सब कुछ ठीक चला. दिल्ली में कई मुख्यमंत्री चुन कर आए, कभी बीजेपी के, तो कभी कांग्रेस के नेता मुख्यमंत्री बने.
कई सरकारों ने पूर्ण राज्य का दर्जा देने के कई वादे किए, लेकिन दिल्ली में जीएनसीटीडी एक्ट के ज़रिए काम काज चलता गया. इसको अमल में लाने के लिए नए बिज़नेस रूल भी 1993 में बने.
अब केंद्र सरकार उसी 1991 जीएनसीटीडी एक्ट में संशोधन लेकर संसद में आई थी.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद से एक नया बिल दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया, जो बुधवार को दोनों सदनों से पारित हो गया.
दिल्ली सरकार का आरोप है कि ये बिल दिल्ली के लेफ़्टिनेंट गवर्नर (एलजी) यानी उप-राज्यपाल को अधिक शक्तियाँ देता है. जबकि केंद्र सरकार का तर्क है कि ये संशोधन विधेयक 1991 अधिनियम में मौजूद विसंगतियों को दूर करता है.
नए बिल में क्या है?
इसमें 1991 के पुराने अधिनियम के चार प्रावधानों में संशोधन की बात कही गई है.
यह बिल उप-राज्यपाल को कई विवेकाधीन शक्तियाँ देता है, जो दिल्ली के विधानसभा से पारित क़ानूनों के मामले में भी लागू होती हैं.
बिल यह सुनिश्चित करता है कि मंत्री परिषद (या दिल्ली कैबिनेट) के फ़ैसले लागू करने से पहले उप-राज्यपाल की राय के लिए उन्हें 'ज़रूरी मौक़ा दिया जाना चाहिए'.
इसका मतलब हुआ कि मंत्रिमंडल को कोई भी क़ानून लागू करने से पहले उप-राज्यपाल की 'राय' लेना ज़रूरी होगा. इससे पहले विधानसभा से क़ानून पास होने के बाद उप-राज्यपाल के पास भेजा जाता था.
नए बिल से पहले दिल्ली में कैसे चलता था कामकाज
संविधान के जानकार प्रोफ़ेसर चंचल कुमार कहते हैं, "संविधान की धारा 239 AA का उद्देश्य था, दिल्ली में चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को कुछ पॉवर देना. इसलिए कैबिनेट का प्रावधान किया गया और गवर्नर को लेफ़्टिनेंट गवर्नर नाम दिया गया. कैबिनेट और एलजी- दोनों के बीच कामकाज का बँटवारा भी किया गया."
"ज़मीन, पब्लिक ऑर्डर और क़ानून व्यवस्था का अधिकार उप-राज्यपाल को दिया गया और बाक़ी दूसरे विषयों का कामकाज दिल्ली सरकार के ज़िम्मे सौंपा गया, जिसमें उप-राज्यपाल को बीच की कड़ी की ज़िम्मेदारी दी गई."
"संविधान की धारा 239 AA में ये प्रावधान भी है कि जब दिल्ली सरकार और एलजी के बीच किसी मुद्दे पर विवाद हो, तो राष्ट्रपति का निर्णय ही मान्य होगा. और इसको लागू करने के लिए संसद क़ानून बना सकती है."
नए बिल की ज़रूरत क्यों पड़ी?
दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश करते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने कहा, "1991 एक्ट में कुछ कमियाँ थीं और कुछ स्पष्टीकरण की ज़रूरत थीं, जिसे इस संशोधन विधेयक से दूर करने की कोशिश की जा रही है."
"चूँकि इसी संसद ने 1991 का एक्ट पास किया था, इस वजह से संसद को इसमें बदलाव का अधिकार है. नए विधेयक में प्रस्तावित संशोधन, हाल में दिए गए कोर्ट के निर्णयों के मुताबिक़ हैं."
यहाँ ये जानना ज़रूरी है कि दिल्ली में वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था तीन क़ानूनों पर आधारित है. संविधान की धारा 239 AA, जीएनसीटीडी एक्ट 1991 और ट्रांजैक्शन ऑफ़ बिज़नेस ऑफ़ जीएनसीटीडी रूल्स 1993.
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