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डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को होगी फांसी
मथुरा। मथुरा जिला कारागार एक बार फिर चर्चा में है। इसकी वहज शबनम को मिली फांसी की सजा है। प्रदेश में मथुरा जेल ही किसी महिला कैदी को फांसी दिये जाने का प्रावधान है। मथुरा जिले में वर्ष 1866 में जेल का निर्माण कराया गया था, तब यहां महिला को फांसी देने के लिए फांसी घर बनाया गया था। हालांकि किसी महिला कैदी को आजादी के बाद मथुरा जेल में अभी तक फांसी नहीं दी गई है। शबनम की फांसी को लेकर मथुरा जेल प्रशासन का कहना है कि अभी तक किसी तरह का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। जहां तक फांसी घर की बात है तो इसका रखरखाव करना हमारी जिम्मेदारी है। यह प्रदेश का इकलौता महिला फांसी घर है। हालांकि, अभी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है। निर्भया के दोषियों को फंदे से लटकाने वाले पवन जल्लाद फांसी घर का निरीक्षण भी कर चुके हैं। 12 मार्च, 2020 को जेल प्रशासन ने मेरठ के पवन कुमार जल्लाद को बुलाकर फांसी घर का निरीक्षण करा लिया था। जल्लाद ने लकड़ी के साल का वर्गा, लीवर, लकड़ी के तख्त और मनीला सन का फंदा समेत रस्सा की व्यवस्था करने को कहा था। सर्वोच्च न्यायालय से पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद अब हत्या के आरोप में बंद शबनम की फांसी की सजा को राष्ट्रपति ने भी बरकरार रखा है, ऐसे में अब उसका फांसी पर लटकना तय हो गया है। मथुरा जेल में महिला फांसीघर में शबनम की फांसी की तैयारी भी शुरू हो गई है। डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जाएगी।
अभी तक फांसी को लेकर किसी तरह का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। मथुरा जेल में महिला का फांसी दिये जाने का प्रावधान है। फांसी स्थल भी है। जेल में फांसी घर होने के कारण उसका रखरखाव हमारी जिम्मेदारी है। शबनम की फांसी की तारीख तय होते ही जेल के फांसी घर में एक ट्रायल कराया जाएगा।
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