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समाचारदेश Alert Star Digital Team Feb 3, 2021 09:46 PM

असम में इस महीने से बंद होंगे सभी सरकारी मदरसे

असम में इस महीने से बंद होंगे सभी सरकारी मदरसे

असम में इस महीने से बंद होंगे सभी सरकारी मदरसे

असम में सभी सरकारी मदरसों को आगामी एक अप्रैल से बंद किया जा रहा है। ऐसे 620 से अधिक संस्थानों को आम स्कूलों में बदल दिया जाएगा। राज्य सरकार ने अपने सेक्युलर स्वरूप के कारण धार्मिक शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देना बंद कर दिया है। राज्य सरकार ने विगत 30 दिसंबर को विधानसभा में एक कानून पारित किया था जिसके तहत सरकारी खर्च से चलने वाले राज्य के सभी मदरसों को आम स्कूलों में बदलने का फैसला लिया गया था। इस फैसले पर अमल एक अप्रैल से होगा।

राज्य सरकार ने धार्मिक शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देना किया बंद

असम के शिक्षा और वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि शिक्षा विभाग को असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने असम रिपीलिंग एक्ट-2020 को मंजूरी दे दी है। हालांकि राज्य सरकार को अभी निजी स्तर पर चल रहे सैकड़ों मदरसों पर कोई फैसला लेना बाकी है।

सरमा ने ट्वीट करके कहा कि असम सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक और प्रगतिशील है। मदरसा एजुकेशन प्रॉवैंशियलाइजेशन एक्ट, 1995 और असम मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2018 को खत्म कर दिया गया है। अब सभी सरकारी मदरसे सामान्य स्कूलों की तरह ही संचालित होंगे। हालांकि कांग्रेस समेत राज्य की विपक्षी पार्टियां सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही हैं।

शिक्षा विभाग का कहना है कि राज्य में सरकार के खर्च पर चले रहे वैदिक शिक्षा दे रहे संस्कृत स्कूलों को भी सरकारी मदद से वंचित कर दिया जाएगा और इन स्कूलों का संचालन अब कुमार भास्करवर्मा संस्कृति विश्वविद्यालय के हवाले कर दिया जाएगा। सरकार को अब तक इन मदरसों के संचालन के लिए हर साल 262 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे थे।

दरअसल, गुवाहाटी विश्वविद्यालय के एक मुसलमान प्रोफेसर के कराए सर्वेक्षण में पाया गया कि अधिकांश माता-पिता को यह भी पता नहीं है कि उनके बच्चों को मदरसे में सामान्य विषय पढ़ाए ही नहीं जाते हैं। असम में मदरसा शिक्षा की शुरुआत वर्ष 1934 में शुरू हुई थी जब ब्रिटिश शासनकाल में सर सैयद मुहम्मद सादुल्ला असम के प्रधानमंत्री बने थे।

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