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बंगाल के सियासी इतिहास पर रास बिहारी की पुस्तकें पठनीय और प्रशंसनीय: मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्दुस्थान समाचार के पूर्व कार्यकारी सम्पादक एवं वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी द्वारा बंगाल की राजनीति पर लिखी तीन पुस्तकों की सराहना करते हुए कहा है कि दशकों के सियासी इतिहास को निष्पक्षता और सही तथ्यों के साथ रेखांकित करते हुए प्रस्तुत करना महती श्रम का कार्य है, जिसे लेखक ने बखूबी साकार किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह बातें गत 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जयंती पर कोलकाता प्रवास के दौरान विक्टोरिया हॉल में पुस्तकों के लेखक रास बिहारी से मुलाक़ात के दौरान कहीं। यह जानकारी देते हुए रास बिहारी ने बताया कि इस विशेष मुलाक़ात के दौरान उन्होंने अपनी तीनों पुस्तकें प्रधानमंत्री मोदी को भेंट कीं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अपने लेखन कार्य को आगे जारी रखना चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी ने कहा कि प्रधानमंत्री से सराहना पाना उनके लिए बहुत मायने रखती है। पश्चिम बंगाल की राजनीति पर रास बिहारी की अब तक तीन पुस्तकें बाजार में आ चुकी हैं। तीनों पुस्तकों "रक्तांचल- बंगाल की रक्तचरित्र राजनीति", "रक्तरंजित बंगाल- लोकसभा चुनाव 2019 "तथा "बंगाल- वोटों का खूनी लूटतंत्र" को यश पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है।
तीनों पुस्तकों की संक्षिप्त जानकारी इस प्रकार है :-
रक्तांचल- बंगाल की रक्तचरित्र राजनीतिः तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा बंद होने की आशंका जताई गई थी। ममता बनर्जी के राज में हर चुनाव में विरोधी दलों की राजनीतिक हिंसा की आशंका सच साबित हुईं हैं। पुस्तक में 2014 के लोकसभा और 2016 के विधानसभा चुनाव के साथ उपचुनावों में हिंसा व धांधली की घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है। पुस्तक बताती है कि तृणमूल कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता कटमनी, सिंडीकेट को लेकर संघर्ष, ठेके कब्जाने के लिए खूनखराबा, रंगदारी वसूलने और अवैध धंधों पर कब्जा करने के लिए किस तरह एक-दूसरे को काटते रहे और बमों से उड़ाते रहे।
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