होम एफआइआर रद कराने के लिए आप नेता संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
एफआइआर रद कराने के लिए आप नेता संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपने खिलाफ दर्ज एफआइआर रद कराने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ये एफआइआर संजय सिंह की 12 अगस्त, 2020 को लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के बाद दर्ज कराई गई थीं। उनका कहना है कि इन्हें राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से दुर्भावनापूर्ण तरीके दर्ज कराया गया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट: एफआइआर रद करने से इन्कार के आदेश को दी चुनौती
एक अलग याचिका में संजय सिंह ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के इसी साल 21 जनवरी के आदेश को भी चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने 12 अगस्त, 2020 को लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के बाद उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर को रद करने से इन्कार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट दो फरवरी को करेगी सुनवाई
सिंह के मुताबिक, उस प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार एक खास जाति का पक्ष ले रही है। उसमें उन्होंने समाज के खास वर्ग के प्रति सरकार की अनदेखी और उदासीनता का मुद्दा उठाया था। उनकी दोनों याचिकाओं पर जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ दो फरवरी को सुनवाई करेगी।
आप नेता ने कहा- भाजपा के इशारे पर दर्ज हुईं एफआइआर
आप नेता ने कहा कि प्रेस कांफ्रेंस के बाद भाजपा सदस्यों के इशारे पर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में विभिन्न पुलिस थानों में उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई थीं। उन्होंने दावा किया कि एफआइआर के तथ्य शब्दश: समान हैं और उन्हें राज्य में 700 किमी से अधिक की दूरी में कई जिलों में एक ही दिन कुछ ही घंटों के अंदर दर्ज कराया गया है।
आप नेता ने कहा- एफआइआर का मकसद राजनीतिक सहयोगियों को परेशान करना है
आप नेता ने कहा कि उन्हें आठ जिलों में दर्ज आठ एफआइआर की जानकारी है जिनमें लखनऊ, संत कबीर नगर, खीरी, बागपत, मुजफ्फरनगर, बस्ती और अलीगढ़ शामिल हैं। इससे साफ है कि इन एफआइआर का मकसद याचिकाकर्ता और उसके राजनीतिक सहयोगियों को परेशान करना है।
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