होम धूर्त कोरोना वायरस कैसे चकमा देता है इम्यून सिस्टम को, दोनों कैसे लड़ते हैं
धूर्त कोरोना वायरस कैसे चकमा देता है इम्यून सिस्टम को, दोनों कैसे लड़ते हैं
हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम यानि प्रतिरोधी क्षमता की बड़ी मज़ेदार कहानी है. दरअसल इम्यूनिटी या प्रतिरोधी क्षमता समय समय पर हमारे शरीर में घुस जाने वाले रोगाणुओ से हमारी रक्षा करती है. लेकिन हमारे शरीर की इस प्रतिरक्षा व्यवस्था को कई बार और कई वायरस भेद लेते हैं या भेदने की कोशिश करते हैं. लेकिन हमारे शरीर की प्रतिरोधी क्षमता भी इन वायरसों का सामना करने को ख़ुद को तैयार करती रहती है. हमारा इम्यून सिस्टम वायरस या वायरसों की चालाकी और धूर्तता को जल्दी ही समझ लेता है और उसका तोड़ ढ़ूंढ लेता है. इसके बाद यह वायरस इंसान के शरीर में रह कर भी कुछ नहीं बिगाड़ पाता है. कहा जा रहा है कि कोविड-19 यानि कोरोना वायरस दरअसल एक बेहद सुक्ष्म दुश्मन है.
तो हमारा इम्यून सिस्टम कैसे हमें वायरस से बचाता है और कोविड-19 से किस हद तक हमें हमारी इम्यूनिटी का स्तर बचा सकता है. कोविड-19 को क़रीब 5 महीने पहले ही नोटिस किया गया है. कोरोना वायरस में कोरना 'क्राउन' शब्द से आया है. दरअसल इस वायरस की उपरी सतह प्राटीन की है और उस पर उसी तरह के कांटे जैसे नज़र आते हैं जैसे किसी ताज में होते हैं. यही स्पाइक्स या कांटे इंसान की कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं. वैज्ञानिक इस वायरस पर शोध तो कर ही रहे हैं इसके साथ साथ सांस से जुड़ी पुरानी बिमारियों से जुड़े पहले से मौजूद शोध का भी सहारा लिया जा रहा है. मक़सद है कि इस वायरस से बचाने वाली प्रतिरोधी क्षमता हमारे शरीर में कैसे पैदा हो जाए.
कोरोना वायरस या कोविड-19 से जुड़ी एक बेहद ख़ास बात यह है कि यह अपने आप हमारे शरीर या घरों में नहीं घुस सकता. हम हैं जो इस वायरस को अपने शरीर या घरों में प्रवेश करने देते हैं. यह वायरस अपने आप में नहीं फैल सकता. इसको फैलने के लिए, विस्तार पाने के लिए हमारे शरीर में मौजूद प्रोटिन, लिपिड और न्यूक्लियोटाइड जैसे तत्वों की ज़रूरत होती है. यह वायरस हमारे शरीर में घुसते ही सबसे पहला काम करते है हमारी अलग अलग कोशिकाओं (cells) को टारगेट करता है. इसके बाद यह कोशिकाओं में घुस जाता है और अपना विस्तार करता है, अपने आप को फैलाता है.
एक बार जब यह वायरस कोशिकाओं में घुस जाता है तो फिर ढेर सारा वायरस पैदा करता है. यह काम यह वायरस हमारे शरीर की प्रतिरोधी व्यवस्था से छुप कर करता है. यू कह सकते हैं कि हमारे शरीर में मौजूद पहरेदारों की नज़र से बच कर यह कोशिकाओं में घुस जाता है और फैल जाता है. एंटीबॉडी प्रोटिन वो तत्व होता है जो शरीर को इस वायरस से बचाता है, कोई भी वैक्सीन दरअसल यही काम करती है कि शरीर में वायरस के ख़िलाफ़ एंटीबॉडी तैयार करती हैं. इस वायरस से लड़ने के लिए एंटीवायरल क्षमता तैयार होने में कई सप्ताह लग जाते हैं. लेकिन जब यह क्षमता तैयार हो जाती है तो फिर इसकी यादाश्त भी बन जाती है. इस स्थिति में अगर वायरस एक बार नष्ट होने के बाद दूसरी बार शरीर में दाख़िल होता है तो एंटिवायरल तत्व तुरंत एक्शन में आ कर इस वायरस को फैलने से रोक देते हैं.
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