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कोरोना के खिलाफ लड़ाई में इटली जैसी गलती नहीं करेगा भारत
इस समय पूरे विश्व में कोरोना वायरस की महामारी है। भारत समेत विश्व के सभी बड़े देश इस महामारी की चपेट में है। तमाम उपाय किए जा रहे हैं पर यह महामारी लगातार विकराल रूप धारण करता जा रहा है। इस महामारी को देखते हुए अस्पतालों में उपचार की कई सुविधाएं बढ़ाए गए ह, डॉक्टरों की तैनाती बढ़ा दी गई है और लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है। कायदे से देखें तो जिस तरीके की यह महामारी है, उसके अनुसार अस्पतालों में एक साथ सभी डॉक्टर्स को लगा दिया जाना चाहिए। लेकिन भारत में ऐसा नहीं हो रहा है। कोरोना महामारी के इस संकट के बीच भारत के अस्पतालों में रोटेशन पॉलिसी के तहत डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती की जा रही है।
आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है
दरअसल यह माना जा रहा है कि अगर एक साथ सभी डॉक्टर और नर्सों को हम अस्पताल में तैनात करते हैं तो उन्हें इस संक्रमण का खतरा हो सकता है। अगर किसी एक डॉक्टर नर्स को कोरोना संक्रमण होता है तो उससे उस वक्त काम करने वाले तमाम लोगों को हो सकता है। इसी को देखते हुए अस्पतालों में रोटेशन पॉलिसी बनाया गया है। इस पॉलिसी के तहत डॉक्टर, नर्स समेत तमाम हॉस्पिटल के स्टाफ को तीन भागों में बांटा गया है। ग्रुप ए, ग्रुप बी और ग्रुप सी।
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