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11 साल के सबसे खराब प्रदर्शन के दौर से जल्द ही उबरेगी भारत की अर्थव्यवस्था
माइनिंग सेक्टर के दिग्गज कारोबारी अनिल अग्रवाल ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था जल्द ही अपने 11 साल के सबसे खराब प्रदर्शन के दौर से उबरेगी. उन्होंने कहा कि करों में भारी कटौती की गयी है, जिससे निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही, बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर भारी-भरकम खर्च की तैयारी है. इससे आर्थिक गतिविधियों में सुधार होगा.
अग्रवाल ने कहा कि बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ सरकार को देश के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचने की संभावना तलाशनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि अर्थव्यवस्था वापस पटरी पर लौटेगी. इसमें व्यापक क्षमता है. मुझे सुरंग के अंतिम छोर पर रोशनी दिख रही है और यह ज्यादा दूर नहीं है. अर्थव्यवस्था जल्द रफ्तार पकड़ेगी.'
उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने का अस्थायी प्रभाव पड़ा था, लेकिन अब यह ठीक हो गया है. चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर 4.5 फीसदी पर 11 साल के निचले स्तर पर आ गसह. सरकार ने 2019-20 के पूरे वित्त वर्ष में पांच फीसदी की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है.
वेदांता के संस्थापक चेयरमैन अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने कंपनियों पर कर की दर घटाकर दुनिया में सबसे कम कर दी है. इससे निवेश आयेगा, लेकिन कंपनियों की परियोजनाएं आगे बढ़ सके, इसके लिए उन्हें कुछ सहयोग की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारत में कर की दर दुनिया में सबसे कम है. यह निवेश के अनुकूल स्थान है. यदि कोई किसी लोकतांत्रिक देश में कारोबार करना चाहता है, तो भारत सर्वश्रेष्ठ स्थान है.
अग्रवाल ने कहा कि दुनिया में आप कहीं कोई परियोजना शुरू करते हैं, तो सरकार यह सुनिश्चित करती है कि परियोजना पूरी हो, लेकिन भारत में आपको अकेला छोड़ दिया जाता है. उन्होंने कहा कि कंपनियों के लिए पर्यावरण नियमों को छोड़कर अन्य सभी को उदार किया जाना चाहिए.
इसके साथ ही, अग्रवाल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के उत्पादकों को खुला हाथ दिया जाना चाहिए. मसलन, कच्चा तेल और तांबा उत्पादकों को पूरी छूट मिनी चाहिए, जिससे वे तेजी से उत्पादन बढ़ा सकें और आयात में कमी लाई जा सके. अग्रवाल ने देश के भीतर प्राकृतिक संसाधनों के पूरे दोहन की वकालत करते हुए कहा कि भारत के पास सोने, तांबा, कच्चा तेल और अन्य खनिज क्षेत्रों में व्यापक क्षमता है.
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