होम जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष बोले- वंदे मातरम् शिर्क पर आधारित, किसी को आस्था के खिलाफ मजबूर न करें
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर चल रही देशव्यापी बहस के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की प्रतिक्रिया सामने आई है। मदनी ने कहा है कि उन्हें वंदे मातरम् पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है,
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर चल रही देशव्यापी बहस के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की प्रतिक्रिया सामने आई है। मदनी ने कहा है कि उन्हें वंदे मातरम् पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता।
वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में चर्चा शुरू की थी। इस बीच अरशद मदनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
मौलाना अरशद मदनी ने वंदे मातरम् का अर्थ समझाते हुए कहा कि, "वंदे मातरम का अनुवाद शिर्क (बहुदेववाद) से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है।"
उन्होंने तर्क दिया:
"इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर दुर्गा माता से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही मां मैं तेरी पूजा करता हूं। यही वंदे मातरम् का अर्थ है।"
अरशद मदनी ने कहा कि यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि "किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।"
उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है। मदनी ने कहा, "वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है।"
वंदे मातरम् पर संसद में विशेष चर्चा में भाग लेते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरकार को घेरा।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।