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समाचारप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Akash Saxena Feb 7, 2025 10:18 PM

वर्ष 2025-26 के लिए यूपी की नई आबकारी नीति में सबसे बड़ा फैसला कंपोजिट दुकानों का मॉडल रखा गया है,जानिए डिटेल में क्या है नई आबकारी नीति

वर्ष 2025-26 के लिए यूपी की नई आबकारी नीति में सबसे बड़ा फैसला कंपोजिट दुकानों का मॉडल रखा गया है,जानिए डिटेल में क्या है नई आबकारी नीति

वर्ष 2025-26 के लिए यूपी की नई आबकारी नीति में सबसे बड़ा फैसला कंपोजिट दुकानों का मॉडल रखा गया है,जानिए डिटेल में क्या है नई आबकारी नीति

लखनऊ : उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है. नई यूपी एक्‍साइज पॉलिसी (New UP Excise Policy) के तहत अब राज्य में शराब की सभी दुकानों के रजिट्रेशन का काम ई-लॉटरी के जरिये किया जाएगा. इस नीति में सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया है कि इस साल ई-लॉटरी के जरिये प्रदेश की सभी देसी शराब की दुकानों, कंपोजिट दुकानों, मॉडल शॉप्स और भांग की दुकानों के अलॉटमेंट का काम किया जाएगा. 

 

ई लॉटरी के जरिये देशी शराब और भांग की दुकानों का होगा आवंटन.

शराब की दुकान के लिए एक आवेदक सिर्फ एक आवेदन करने का मौका मिलेगा.

प्रदेश में एक व्यक्ति को 2 दुकानों से अधिक नहीं होगा आवंटन.

कंपोजिट दुकान का प्रस्ताव हुआ पास.

कंपोजिट दुकान के तहत शराब-बीयर की आसपास की दुकाने होंगी मर्ज.

प्रोसेसिंग फीस को 5 श्रेणियों में बांटा गया. पहली श्रेणी में गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और कानपुर के नगर निगम क्षेत्र और उनके तीन किलोमीटर की परिधि का क्षेत्र शामिल होगा.

दूसरी श्रेणी में पहली श्रेणी में शामिल महानगरों को छोड़कर बाकी जो बड़े शहर बचते हैं, उनमें और उनकी तीन किलोमीटर की परिधि में शराब की दुकानों (देसी शराब, कंपोजिट दुकान, मॉडल शॉप्स और भांग की दुकान) के लिए क्रमश: 60 हजार रुपये, 85 हजार रुपये, 90 हजार रुपये और 25 हजार रुपये प्रोसेसिंग शुल्क तय किया गया है.

तीसरी श्रेणी में सभी नगर पालिका क्षेत्रों और उनके तीन किलोमीटर की परिधि के इलाकों को शामिल किया गया है. इनमें देसी शराब, कंपोजिट दुकान, मॉडल शॉप्स और भांग की दुकान के लिए क्रमश: 50 हजार रुपये, 75 हजार, 80 हजार और 25 हजार रुपये प्रोसेसिंग शुल्क तय किया गया है.

चौथी श्रेणी में नगर पंचायत की सीमा और उसके तीन किलोमीटर की परिधि के इलाकों को शामिल किया गया है. इनमें प्रोसेसिंग शुल्क क्रमश: 45 हजार रुपये, 65 हजार रुपये, 70 हजार रुपये और 25 हजार रुपये रखा गया है.

पांचवीं श्रेणी में ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किया गया है. उनमें देसी मदिरा, कंपोजिट दुकान, मॉडल शॉप्स और भांग की दुकान के लिए प्रोसेसिंग शुल्क क्रमश: 40 हजार रुपये, 55 हजार रुपये, 60 हजार रुपये और 25 हजार रुपये तय किया गया है.

नई नीति में कंपोजिट दुकान के रूप में एक नया मॉडल पेश हुआ. कम्पोजिट दुकान का मतलब हुआ कि अलग-अलग तरह की बियर और बाकी तरह की शराब की दुकानों को मिलाकर एक दुकान का स्वरूप दिया जाएगा. ऐसा होने से उपभोक्ताओं को एक ही दुकान पर सारी चीजें उपलब्ध हो जाएंगी.

कंपोजिट दुकानों में एक व्यवस्था यह भी की गई है कि अगर कहीं पर बियर की दुकान और विदेशी शराब की दुकान अगल-बगल है तो उन्हें एक साथ जोड़कर एक ही दुकान बना दी जाएगी.

यह भी तय किया गया है कि उत्तर प्रदेश के जिन किसानों से फल खरीदकर शराब बनाई जा रही है, उनकी हर जिला मुख्यालय पर एक शराब की दुकान व्यवस्थित कराई जाएगी, जिससे वह प्रोत्साहित हों. मंडल मुख्यालयों पर ऐसी दुकानों की लाइसेंस फीस 50 हजार रुपये और बाकी जिला मुख्यालयों पर 30 हजार रुपये तय की गई है.

ग्लास की जगह अब ट्रेटा पैक में ही बिकेगी शराब.

प्रोसेसिंग शुल्क के तौर पर देसी मदिरा की दुकान के लिए 65 हजार रुपये, कंपोजिट दुकान के लिये 90 हजार रुपये, मॉडल शॉप्स के लिए एक लाख रुपये तथा भांग की दुकान के लिए 25 हजार रुपये की राशि तय की गई है.

शराब की लाइसेंस फीस 254 से 260 रूपये/लीटर की गई.

शराब के मार्जिन में भी की गई बढ़ोत्तरी.

मॉडल शॉप और भांग की दुकान के लाइसेंस फीस 10% बढ़ी.

हर जिले में एक फ्रूट वाइन शॉप खुलेगी.

मंडल पर फ्रूट वाइन शॉप की फीस 30 हजार मंडल पर 50 हजार होगी.

मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 60 हजार करोड़ रखा गया.

अब शराब की दुकान के लिए FDR के साथ बैंक गारंटी देनी होगी.

मदिरा परिवहन के लिए बनेंगे ऑन लाइन पास.

शराब की दुकान के खुले रहने का समय सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक रहेगा.

Akash Saxena

Akash Saxena

Mr. Akash Saxena is Chief Managing Editor at Aler Star News published from Shahjahanpur, Uttar Pradesh, India

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