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समाचारप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Nida Khan Jan 17, 2026 09:32 AM

दुष्कर्म–पॉक्सो केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,जानें क्या है

अभियुक्त बंशी बरी हुआ, मेडिकल साक्ष्य से अभियोजन कथा खारिज हुई, पीड़िता की उम्र व बयानों पर गंभीर संदेह

दुष्कर्म–पॉक्सो केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,जानें क्या है

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जनपद मुज़फ्फरनगर, थाना पुरकाजी से जुड़े दुष्कर्म एवं पॉक्सो अधिनियम के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अभियोजन साक्ष्यों को अविश्वसनीय मानते हुए अभियुक्त बंशी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

यह मामला क्रिमिनल अपील संख्या 10604/2024 से संबंधित है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने अभियुक्त को धारा 363, 366, 376-डी भारतीय दंड संहिता तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास सहित विभिन्न सजाएँ सुनाई थीं। इस अपील में अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता रितेश सिंह ने पक्ष रखा और न्यायालय के समक्ष अभियोजन की खामियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि पीड़िता की चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार वह लगभग 21 सप्ताह से अधिक गर्भवती पाई गई, जबकि अभियोजन द्वारा बताई गई घटना-तिथियों से पूर्व ही गर्भ ठहरना सिद्ध हो रहा है। इस कारण मेडिकल साक्ष्य अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं करता।

न्यायालय ने यह भी पाया कि पीड़िता के बयान एफआईआर, धारा 161, धारा 164 तथा न्यायालय में दिए गए बयान में गंभीर विरोधाभास हैं। घटनाओं की तिथि, स्थान और घटनाक्रम को लेकर एकरूपता के अभाव में पीड़िता की गवाही को पूर्णतः विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।

इसके अतिरिक्त, पीड़िता की आयु के संबंध में अभियोजन द्वारा मूल विद्यालय अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे उसे नाबालिग सिद्ध नहीं किया जा सका। वहीं, मामले में डीएनए अथवा एफएसएल रिपोर्ट का अभाव भी अभियोजन के लिए घातक सिद्ध हुआ।

इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए अभियुक्त को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।

Nida Khan

Nida Khan

Managing director circulation/advertising and special reporter at Alert Star News

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