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समाचारविदेश Alert Star Digital Team Jan 16, 2026 03:00 PM

Middle East Crisis: इन 3 मुस्लिम देशों ने रुकवा दिया ईरान पर अमेरिका का हमला, जानिए ट्रंप को कैसे मनाया

मध्य पूर्व एक बार फिर भयानक युद्ध की आग में झुलसने के बेहद करीब पहुंच गया था। अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी इस कदर बढ़ गई थी कि माना जा रहा था कि किसी भी वक्त मिसाइलें चल सकती हैं। लेकिन ऐन मौके पर सऊदी अरब, कतर और ओमान की शानदार कूटनीति ने बाजी पलट दी।

Middle East Crisis: इन 3 मुस्लिम देशों ने रुकवा दिया ईरान पर अमेरिका का हमला, जानिए ट्रंप को कैसे मनाया

मध्य पूर्व एक बार फिर भयानक युद्ध की आग में झुलसने के बेहद करीब पहुंच गया था। अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी इस कदर बढ़ गई थी कि माना जा रहा था कि किसी भी वक्त मिसाइलें चल सकती हैं। लेकिन ऐन मौके पर सऊदी अरब, कतर और ओमान की शानदार कूटनीति ने बाजी पलट दी। इन तीन मुस्लिम देशों की सक्रियता और सूझबूझ ने हालात को बिगड़ने से बचा लिया। खाड़ी देशों के अधिकारियों ने गुरुवार (15 जनवरी 2026) को खुलासा किया कि कैसे युद्ध के काले बादलों को हटाने के लिए उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मनाया और एक विनाशकारी संघर्ष को टाल दिया।

ट्रंप के साथ हुई 'आखिरी वक्त' की बातचीत

खाड़ी देशों के अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर था। युद्ध की इसी आशंका को खत्म करने के लिए सऊदी अरब, कतर और ओमान ने मोर्चा संभाला और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लगातार संपर्क बनाए रखा। इन देशों ने ट्रंप को समझाने की पुरजोर कोशिश की कि ईरान पर हमला करने से पहले उसे अपनी मंशा साफ करने का एक मौका जरूर दिया जाना चाहिए। अधिकारियों ने इस पूरी कवायद को 'आखिरी वक्त की कूटनीतिक जद्दोजहद' करार दिया, जिसने अंततः रंग दिखाया।

अल-उदेद एयरबेस खाली कराने की नौबत आ गई थी

हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने कतर स्थित अपने अल-उदेद एयरबेस से सैन्य कर्मियों को हटाना शुरू कर दिया था। यह मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। दरअसल, अमेरिका ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और दमन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी, जिसके जवाब में तेहरान ने खाड़ी में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दे डाली थी। इस तनाव के चलते पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर थीं और युद्ध की आहट साफ सुनाई दे रही थी।

सऊदी अरब ने अमेरिका और ईरान दोनों को दी चेतावनी

एएफपी (AFP) की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने अमेरिकी नेतृत्व को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र के लिए तबाही का कारण बनेगा और हालात बेकाबू हो जाएंगे। वहीं, खाड़ी देशों ने सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि ईरान से भी सीधी बात की। उन्होंने तेहरान को दो टूक संदेश दिया कि अगर उसने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया, तो पड़ोसी देशों के साथ उसके रिश्ते हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। इस दोतरफा दबाव ने तनाव कम करने में बड़ी भूमिका निभाई।

फांसी रोकने के आश्वासन पर माने ट्रंप

सऊदी अरब, कतर और ओमान की मध्यस्थता रंग लाई। ईरान की तरफ से अमेरिका को भरोसा दिलाया गया कि वह प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं देगा। इस आश्वासन के बाद अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई का इरादा बदल दिया। डोनाल्ड ट्रंप के तेवर भी नरम पड़े और उन्होंने कहा कि उन्हें "दूसरी तरफ के बेहद महत्वपूर्ण सूत्रों" से भरोसा मिला है कि ईरान कोई कठोर कदम नहीं उठाएगा। इसी आधार पर अमेरिका ने हमला न करने का फैसला लिया और अल-उदेद एयरबेस पर सुरक्षा का स्तर घटा दिया गया। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि संकट फिलहाल टल गया है, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए बातचीत का दौर अभी भी जारी है।

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