होम भुवनेश्वर में एससी-एसटी कल्याण संबंधी संसद,राज्य विधानमंडलों की समितियों के सभापतियों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में,जानिए क्या कहा सांसद अरुण सागर ने
सांसदअरुण सागर ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य मकसद विभिन्न राज्यों में एससी/एसटी कल्याण समितियों की सिफारिशों, अध्ययनों और कार्यान्वयन की स्थिति पर विचार-विमर्श करना है।
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में शुक्रवार को अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समितियों के अध्यक्षों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसके मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला थे जिसका समापन समारोह आज शनिवार को संपन्न हुआ | कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने राज्य और देश के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर बताया।
सांसद अरुण सागर ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समितियों के सभापतियों का पहला सम्मेलन 1976 में नयी दिल्ली में आयोजित किया गया था, इसके बाद 1979, 1983, 1987 और 2001 में सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और संवैधानिक सुरक्षोपायों के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की गई | इस सम्मेलन का आयोजन दिल्ली से बाहर पहली बार किया गया है. यह सम्मेलन करीब 31 वर्षों के अंतराल के बाद ओडिशा में फिर से आयोजित हुआ है, जिसमें संसद और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की एससी/एसटी समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों ने हिस्सा लिया।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में लगभग 20 राज्यों के प्रतिनिधि,कमेटी के चेयरमैन केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी उड़ीसा के राज्यपाल Dr Hari Babu Kambhampati, जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित प्रमुख केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला
सांसदअरुण सागर ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य मकसद विभिन्न राज्यों में एससी/एसटी कल्याण समितियों की सिफारिशों, अध्ययनों और कार्यान्वयन की स्थिति पर विचार-विमर्श करना है। साथ ही, यह एक ऐसा मंच है जहां सभी राज्य एक-दूसरे से सीख सकते हैं और बेहतरीन नीतियों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा जैसे जनजातीय बहुल राज्य में इस प्रकार का सम्मेलन होना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा, यह गर्व की बात है कि इस राज्य से देश के राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री दोनों ही आते हैं। राज्य सरकार अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण के लिए जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक पूरी तरह से समर्पित है।
सांसद अरुण सागर ने आगे कहा कि यह सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान और सहयोगात्मक रणनीतियों को साझा करने का एक सशक्त मंच है। इसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है।
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