होम महाभारत काल में पांडवों द्वारा निर्माण कराए गए प्राचीन तिकोला देवी मंदिर में 30 साल बाद पुलिस ने पकड़ा जुआं
शाहजहांपुर में वर्षो पुरानी परंपरा के तहत जुआं खेलने की एक ऐसी जगह है जहाँ पिछले तीन दशकों से थाना पुलिस से लेकर बड़े बड़े अधिकारी भी जाने की हिम्मत नही जुटा पाये
शाहजहांपुर।(Nandlal Singh) ताश के पत्तो के खेल से हर कोई वाकिफ़ है।कुछ लोग त्यौहार पर इसे खेलते हैं और कुछ लोग इसके आदी हो जाते हैं। इस जुएं को खेलने के लिए हर कोई पुलिस से बचना चाहता है। क्योंकि कानून की नजर में यह अपराध है।अब हम आपको ऐसी बात बताने जा रहे हैं जो शायद शाहजहांपुर के अलावा अन्य जिलों के लोगो को नही पता है। वैसे तो पुलिस हर आपराधिक घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुँचकर कार्यवाही करती हैं।
लेकिन शाहजहांपुर में वर्षो पुरानी परंपरा के तहत जुआं खेलने की एक ऐसी जगह है जहाँ पिछले तीन दशकों से थाना पुलिस से लेकर बड़े बड़े अधिकारी भी जाने की हिम्मत नही जुटा पाये। बात हो रही है जलालाबाद स्थित तिकोला देवी मंदिर की। बताया जाता है कि महाभारत काल में इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने कराया था। अज्ञातवास के दौरान पांडव इस मन्दिर में रुके थे और उन्होने यहाँ पर टाईम पास करने के लिए जुआं खेला था। तब से प्रतीक के रूप में इस मन्दिर में जुआ खेलने की परंपरा निरंतर जारी है। जनपद से लेकर गैर जनपद के लोग भी यहाँ जुआ खेलने आते हैं। पुलिस को ये बात पता है कि यहां मन्दिर पर खुले आम जुआं होता है लेकिन आज तक पुलिस ने यहां का जुआं नही पकड़ा क्युंकि यहां जुआं खेलना एक मान्यता बन गई है।आज पुलिस अधीक्षक एस आनंद के निर्देश पर जलालाबाद पुलिस ने भारी फोर्स के साथ यहां छापेमारी कर 2 लाख रुपए नगद ,80बीयर की केन ,40 पौव्वे देशी शराब और 40 लीटर कच्ची शराब ,एक कार,15 फोन और 7 लाइसेंसी असलाह के साथ 18 जुआरियों को गिरफ्तार किया है।
इस मामले में पुलिस अधीक्षक एस आनंद ने बताया कि यह सबसे पुराना मंदिर है। यहाँ कोई भी आये और पूजापाठ करे। लेकिन आस्था की आड़ में जुआं खेलना और आपराधिक लोगो का जमावड़ा लगना कानून का उल्लंघन है। इसीलिये ये कार्यवाही की गई है।
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