होम 22 साल की उम्र में छोड़ा घर-परिवार, 26 में बने सांसद और फिर CM... जानिए योगी आदित्यनाथ के राजयोगी बनने की पूरी कहानी

समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Jun 5, 2026 06:13 PM

22 साल की उम्र में छोड़ा घर-परिवार, 26 में बने सांसद और फिर CM... जानिए योगी आदित्यनाथ के राजयोगी बनने की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज 54 वर्ष के हो गए हैं। 5 जून को जन्मे योगी आदित्यनाथ भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने धार्मिक जीवन से निकलकर राजनीति के शीर्ष पद तक का सफर तय किया।

22 साल की उम्र में छोड़ा घर-परिवार, 26 में बने सांसद और फिर CM... जानिए योगी आदित्यनाथ के राजयोगी बनने की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज 54 वर्ष के हो गए हैं। 5 जून को जन्मे योगी आदित्यनाथ भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने धार्मिक जीवन से निकलकर राजनीति के शीर्ष पद तक का सफर तय किया। गोरक्षपीठ के महंत से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने तक उनकी यात्रा संघर्ष, अनुशासन और राजनीतिक सक्रियता से भरी रही है।

उत्तराखंड के छोटे गांव से शुरू हुई यात्रा

योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में हुआ था। उनका मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है। उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट और माता सावित्री देवी हैं। सात भाई-बहनों के परिवार में योगी पांचवें स्थान पर हैं।

प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उनका झुकाव सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ने लगा था।

22 साल की उम्र में लिया संन्यास

योगी आदित्यनाथ के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने मात्र 22 वर्ष की उम्र में सांसारिक जीवन छोड़ने का निर्णय लिया। वर्ष 1993 में उच्च शिक्षा के दौरान उनका गोरखपुर आना हुआ और वे गोरखनाथ मंदिर से जुड़े।

15 फरवरी 1994 को उन्होंने गोरक्षपीठ के तत्कालीन पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ से दीक्षा ग्रहण की। इसके बाद अजय सिंह बिष्ट, योगी आदित्यनाथ के नाम से पहचाने जाने लगे और धार्मिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।

26 साल की उम्र में बने देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल

महंत अवेद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ की संगठन क्षमता और जनसंपर्क को देखते हुए उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया। वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में उन्हें गोरखपुर से उम्मीदवार बनाया गया।

योगी आदित्यनाथ ने चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया और उस समय देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने लगातार 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की।

गोरक्षपीठ और जनसेवा की दोहरी जिम्मेदारी

सांसद बनने के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ पर गोरक्षपीठ के धार्मिक और सामाजिक संस्थानों के संचालन की जिम्मेदारी भी रही। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े कई संस्थानों का प्रबंधन उन्होंने संभाला।

गोरक्षनाथ मंदिर में लगने वाला जनता दरबार उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना, जहां बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते रहे।

विवादों और चुनौतियों के बीच बढ़ता राजनीतिक कद

राजनीतिक जीवन के दौरान योगी आदित्यनाथ कई बार विवादों के केंद्र में भी रहे। धर्मांतरण, हिंदुत्व, कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक मुद्दों पर उनके बयानों को लेकर अक्सर राजनीतिक बहस होती रही।

इसके बावजूद पूर्वांचल क्षेत्र में उनका जनाधार लगातार मजबूत होता गया। उन्होंने अपने समर्थकों के बीच हिंदुत्व और विकास दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

बीजेपी में अलग पहचान बनाने वाले नेता

योगी आदित्यनाथ ने कई मौकों पर पार्टी के भीतर भी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान दिखाई। वर्ष 2007 और 2009 के दौरान उन्होंने संगठनात्मक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी, जिससे उनका प्रभाव और बढ़ा।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में उनकी लोकप्रियता का लाभ बीजेपी को लगातार मिलता रहा और धीरे-धीरे वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।

2017 में पहली बार बने मुख्यमंत्री

वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री चुना गया। 19 मार्च 2017 को उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, निवेश और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अपनी प्राथमिकताओं में रखा।

2022 में दोबारा मिली सत्ता

पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी ने 2022 का विधानसभा चुनाव भी जीता। 25 मार्च 2022 को उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करने वाले वे बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने। इसी चुनाव में उन्होंने गोरखपुर शहर विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधायक के रूप में विधानसभा पहुंचने का भी रिकॉर्ड बनाया।

अनुशासित दिनचर्या और कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए पहचान

योगी आदित्यनाथ अपनी सख्त कार्यशैली और अनुशासित दिनचर्या के लिए भी जाने जाते हैं। सुबह जल्दी उठकर योग, पूजा-पाठ और प्रशासनिक बैठकों से शुरू होने वाला उनका दिन देर रात तक चलता है।

कानून-व्यवस्था के मामलों में सख्त रुख और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी उनकी सरकार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही है। समर्थक इसे अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई बताते हैं, जबकि विपक्ष अक्सर इसकी आलोचना करता रहा है।

राष्ट्रीय राजनीति में लगातार बढ़ रहा कद

मुख्यमंत्री के रूप में दो सफल कार्यकाल पूरे करने के बाद योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कद लगातार बढ़ा है। वे बीजेपी के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हैं और देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव प्रचार की कमान संभालते रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले नेताओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति के महत्वपूर्ण चेहरों में भी देखते हैं।

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