होम 2027 के बाद क्या होगी Yogi Adityanath की भूमिका? PM बनने की अटकलों पर CM ने दिया दो टूक जवाब
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 2027 के बाद संभावित राष्ट्रीय भूमिका को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री ने एक इंटरव्यू में इन अटकलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 2027 विधानसभा चुनाव के बाद भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री ने अपने भविष्य की राष्ट्रीय भूमिका और प्रधानमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर जवाब दिया है। द स्टेट्समैन को दिए एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या वह खुद को भविष्य में प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर देखते हैं या उत्तर प्रदेश ही उनकी कर्मभूमि बना रहेगा। मुख्यमंत्री ने जवाब में अपने मौजूदा दायित्व और उत्तर प्रदेश के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित बताया।
मुख्यमंत्री से पूछा गया कि 2027 के बाद उनकी राष्ट्रीय भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं और क्या वह खुद को भविष्य के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में देखते हैं। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा, "मैं सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी की भावना और राष्ट्र प्रथम को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत मानकर आया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश के लोगों की सेवा करने की जिम्मेदारी सौंपी है. मैं इसे अपने सार्वजनिक जीवन के सबसे बड़े विशेषाधिकार और बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखता हूं. मेरा पूरा ध्यान यूपी को आर्थिक, सामाजिक और गवर्नेंस मॉडल के स्तर पर आगे ले जाने पर है."
इस जवाब में मुख्यमंत्री ने अपने मौजूदा दायित्व को प्रमुखता दी और उत्तर प्रदेश को आर्थिक, सामाजिक तथा शासन के स्तर पर आगे बढ़ाने को अपना मुख्य फोकस बताया।
इंटरव्यू के दौरान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में NDA के सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर भी मुख्यमंत्री से सवाल किया गया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे का विषय संगठन के स्तर पर तय किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज, जिले और परिवार के स्तर तक पहुंचे। उनका जोर समाज के सभी वर्गों के विकास और राज्य की प्रगति में उनकी भागीदारी पर है।
योगी आदित्यनाथ से यह भी पूछा गया कि अयोध्या के बाद सरकार का फोकस काशी और मथुरा की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। क्या इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है या फिर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों से ध्यान हटाना?
मुख्यमंत्री ने जवाब में कहा कि अयोध्या, मथुरा और काशी उत्तर प्रदेश की विरासत का हिस्सा हैं। उनके अनुसार इस विरासत को संरक्षित करने के साथ उसका विकास भी किया जा सकता है और दोनों काम एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में इसका उद्घाटन किया था। उनके अनुसार, इसके बाद काशी में 25 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधि हुई।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस आर्थिक गतिविधि का फायदा नाविकों, बुनकरों, रेहड़ी लगाने वालों, पुजारियों, ऑटो चालकों, होटल संचालकों और होमस्टे चलाने वाले लोगों तक पहुंचा। उन्होंने इसे इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित पर्यटन से रोजगार और स्थानीय आजीविका पैदा होने का उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह की स्थिति अयोध्या और प्रयागराज में भी देखने को मिली है। उनके अनुसार राम मंदिर के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई, जबकि महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज में करीब 66 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने यह भी कहा कि विरासत से जुड़े विकास का मतलब स्वास्थ्य और शिक्षा के बजट को कम करना नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी सरकार ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी से निपटने के लिए काम किया है और मेडिकल शिक्षा तथा स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार किया है।
योगी आदित्यनाथ ने इंटरव्यू में कहा कि राज्य में मेडिकल शिक्षा का विस्तार किया गया है और उत्तर प्रदेश में अब 80 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार की विकास नीति में विरासत, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसरों को साथ लेकर चलने पर जोर है।
इस तरह 2027 के बाद अपनी राष्ट्रीय भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने किसी संभावित पद की घोषणा करने के बजाय उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी और राज्य के विकास को अपने मौजूदा फोकस के तौर पर सामने रखा है। वहीं काशी, अयोध्या और मथुरा से जुड़े सवाल पर उन्होंने विरासत संरक्षण और विकास को साथ लेकर चलने की बात कही।
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