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कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण पांच राज्यों का चुनाव, जनाधार में हो सकती है बढ़ोत्तरी
देश के पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है। इन पांच राज्यों में से उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी चार राज्यों में कांग्रेस पार्टी मुख्य चुनावी मुकाबले में है। फिलहाल पांच में से चार राज्यों में भाजपा व पंजाब में कांग्रेस पार्टी का शासन है। कांग्रेस पार्टी इन सभी पांच राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करके अपने घटते जनाधार को रोक सकती है। पंजाब के साथ ही उत्तराखंड, गोवा व मणिपुर में कांग्रेस के फिर से सरकार बनाने की संभावनाएं बताई जा रही है।
2017 के विधानसभा चुनाव के चुनावी नतीजों का विश्लेषण करें तो गोवा में कांग्रेस पार्टी ने 40 में से 36 सीटों पर चुनाव लड़कर 17 सीटें जीती थी। वहां कांग्रेस को दो लाख 59 हजार 758 वोट यानि 28.4 प्रतिशत वोट मिले थे। जबकि वहां भाजपा मात्र 13 सीटों पर ही जीत पाई थी। उसके उपरांत भी कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दिग्विजय सिंह की ढिलाई के चलते सत्ता के नजदीक पहुंच कर भी कांग्रेस सरकार बनाने से चूक गई थी। इस बार गोवा में कांग्रेस ने गोवा फारवर्ड पार्टी से चुनावी गठबंधन कर चुनाव लड़ा है।
हालांकि गोवा में कांग्रेस को कई दिग्गज नेताओं के पार्टी छोड़ने से झटके भी लगे हैं। चार बार मुख्यमंत्री व 50 साल तक विधायक रह चुके प्रतापसिंह राणे इस बार पर्ये विधानसभा सीट पर कांग्रेस टिकट मिलने के बावजूद भाजपा से अपनी पुत्रवधू डॉ दिव्या रानी के उम्मीदवार बनने पर उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। इससे कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा। जबकि कांग्रेस इस बार गोवा में अपनी पार्टी की सरकार बनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है।
उत्तराखंड में भी कांग्रेस सरकार बनाने के प्रति काफी आशान्वित हैं। इससे वहां भी अभी से मुख्यमंत्री पद के दावेदारो में खींचतान शुरू हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 70 में से मात्र 11 सीटें ही जीत सकी थी। उस वक्त कांग्रेस के मुख्यमंत्री हरीश रावत हरिद्वार ग्रामीण व किच्छा दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव हार गए थे। 2017 में कांग्रेस को 16 लाख 65 हजार 64 यानी 33.5 प्रतिशत मत मिले थे। पिछले विधानसभा चुनाव से पूर्व उत्तराखंड कांग्रेस के कई बड़े नेता भाजपा में शामिल हो गए थे। जिससे कांग्रेसी को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे किशोर उपाध्याय व महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सविता आर्य भाजपा में शामिल हो गई है। उसकी भरपाई के लिए कांग्रेस ने यशपाल आर्य व उनके पुत्र संजीव आर्य को भाजपा छोड़कर फिर से कांग्रेस में शामिल करवा लिया था।
मणिपुर में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 60 में से 28 सीटें जीती थी। वहीं भाजपा ने मात्री 21 सीटें जीती थी। मगर कांग्रेस के नेताओं की कमजोरी के चलते वहां भाजपा की सरकार बन गई थी। उस चुनाव में कांग्रेस को 35.10 प्रतिशत वोट मिले थे। मणिपुर में सरकार बनाने को लेकर कांग्रेसी इस बार पूरी सतर्क नजर आ रही है। कांग्रेस इस बार मणिपुर में सरकार बनाने का कोई भी अवसर छोड़ना नहीं चाह रही है। क्योंकि पूर्वोत्तर में कभी कांग्रेस का एकछत्र राज होता था। मगर आज वहां के सभी आठों प्रदेशों में कांग्रेस सत्ता से बाहर है। इसलिए मणिपुर के रास्ते कांग्रेस एक बार फिर पूर्वोत्तर में अपना वर्चस्व स्थापित करने का पूरा प्रयास कर रही है।
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