होम जोहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई को लेकर CJP ने उठाई आवाज, सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की अपील
नीट पेपर लीक मामले के बाद देश की राजनीति में चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब उत्तर प्रदेश में जोहर यूनिवर्सिटी को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
नीट पेपर लीक मामले के बाद देश की राजनीति में चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब उत्तर प्रदेश में जोहर यूनिवर्सिटी को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। पार्टी ने रामपुर स्थित जोहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई का विरोध करते हुए राज्य सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और आदेश वापस लेने की मांग की है।
सीजेपी का कहना है कि ऐसे समय में, जब देश में लगातार शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं, किसी यूनिवर्सिटी को ध्वस्त करना शिक्षा व्यवस्था के लिए उचित कदम नहीं माना जा सकता। पार्टी ने इसे शिक्षा के हितों के खिलाफ बताया है।
देश में तो वैसे ही रिपोर्ट के अनुसार लगभग 20 स्कूल से अधिक रोज बंद हो रहे है,
— Cockroach Janta Party (@CJP_for_India) July 27, 2026
ऐसे में उत्तर प्रदेश में यूनिवर्सिटी को गिराया जाना मतलब शिक्षा को कुचलने जैसा फैसला होगा,
जो इस देश के लिए कतई सही नहीं होगा,
इस फैसले को सरकार को पुनर्विचार करके वापस लेना चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीजेपी ने लिखा, 'देश में तो वैसे ही रिपोर्ट के अनुसार लगभग 20 स्कूल से अधिक रोज बंद हो रहे है, ऐसे में उत्तर प्रदेश में यूनिवर्सिटी को गिराया जाना मतलब शिक्षा को कुचलने जैसा फैसला होगा, जो इस देश के लिए कतई सही नहीं होगा.'
पार्टी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को इस निर्णय पर दोबारा विचार करना चाहिए और जोहर यूनिवर्सिटी को गिराने संबंधी आदेश को वापस लेना चाहिए।
रामपुर विकास प्राधिकरण ने जोहर यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद 40 इमारतों में से 38 को अवैध निर्माण घोषित किया है। प्रशासन ने इन भवनों को हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई का आदेश जारी किया है।
रामपुर के जिलाधिकारी के अनुसार संस्थान को अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। यदि तय अवधि में कार्रवाई नहीं होती है तो रामपुर विकास प्राधिकरण स्वयं ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करेगा। प्रशासन के इस फैसले का समाजवादी पार्टी विरोध कर रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने इससे पहले नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में सोनम वांगचुक प्रमुख चेहरा थे, जबकि आयोजन की जिम्मेदारी पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने संभाली थी।
पार्टी का दावा है कि उसके आंदोलन के बाद सरकार ने मांगों पर कार्रवाई की, जिसके तहत धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षामंत्री पद से इस्तीफा दिया और प्रभावित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।
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