होम UP School Merger: यूपी स्कूल मर्जर पर हाईकोर्ट की फटकार, सीतापुर में रोक — पूछा सरकार से- बिना प्लान के क्यों किया फैसला?
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से राज्य के हजारों प्राथमिक स्कूलों के विलय (मर्जर) की योजना को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा आदेश दिया है। सीतापुर जिले से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मर्जर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाते हुए सरकार से यथास्थिति बनाए रखने को कहा है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से राज्य के हजारों प्राथमिक स्कूलों के विलय (मर्जर) की योजना को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा आदेश दिया है।
सीतापुर जिले से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मर्जर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाते हुए सरकार से यथास्थिति बनाए रखने को कहा है।
कोर्ट ने मर्जर प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाईं और इसपर कड़ी नाराजगी भी जताई।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की डबल बेंच ने राज्य सरकार से तीखे सवाल किए।
“आपके पास कोई सर्वे नहीं, कोई स्पष्ट प्लान नहीं —
जब बच्चे स्कूल में आने को तैयार नहीं, तो मर्जर किस आधार पर किया गया?”
अदालत ने पूछा, “शिक्षकों पर जबरन दबाव क्यों बनाया जा रहा है?”
कोर्ट ने पाया कि जिन स्कूलों में 50 से अधिक छात्र नामांकित हैं,
उन्हें भी मर्जर लिस्ट में शामिल किया गया —
जो कि साफ तौर पर RTE (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के खिलाफ है।
RTE के अनुसार, 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए
निर्धारित दूरी के भीतर स्कूल उपलब्ध होना अनिवार्य है।
मर्जर से बच्चों को 3-5 किलोमीटर दूर तक पैदल जाना पड़ सकता है।
राज्य सरकार के इस कदम के खिलाफ
प्राथमिक शिक्षक संघ और अन्य संगठनों ने
राज्यव्यापी प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
लखनऊ में हजारों शिक्षक और कर्मचारी
“स्कूल बचाओ, शिक्षा बचाओ” के नारे के साथ सड़कों पर उतरे।
उनका आरोप है कि:
राज्य सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि:
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि:
फिलहाल सीतापुर जिले में स्कूल मर्जर पर रोक लागू कर दी गई है।
सरकार को अगली सुनवाई में 21 अगस्त तक अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार के स्कूल मर्जर प्लान को न्यायिक झटका मिला है।
हाईकोर्ट ने दो टूक कहा – बिना योजना, बिना सर्वे, बच्चों और शिक्षकों की अनदेखी कर ऐसा फैसला नहीं लिया जा सकता।
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