होम यूपी में ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी की असली वजह आई सामने, आबादी ज्यादा फिर भी ठाकुरों से पिछड़े, ये आंकड़े खोल रहे पोल

समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Dec 26, 2025 07:38 PM

यूपी में ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी की असली वजह आई सामने, आबादी ज्यादा फिर भी ठाकुरों से पिछड़े, ये आंकड़े खोल रहे पोल

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों जातिगत समीकरणों को लेकर भारी उथल-पुथल मची हुई है। हाल ही में ठाकुर कुटुंब की तर्ज पर हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने भारतीय जनता पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।

यूपी में ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी की असली वजह आई सामने, आबादी ज्यादा फिर भी ठाकुरों से पिछड़े, ये आंकड़े खोल रहे पोल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों जातिगत समीकरणों को लेकर भारी उथल-पुथल मची हुई है। हाल ही में 'ठाकुर कुटुंब' की तर्ज पर हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने भारतीय जनता पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को सामान्य नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे पार्टी के भीतर जातीय संतुलन बिगड़ने और असंतोष के स्वर के रूप में देखा जा रहा है। सियासी जानकार इसे सीधे तौर पर 'ठाकुर बनाम ब्राह्मण' की वर्चस्व की लड़ाई और सत्ता में अपनी हिस्सेदारी के लिए दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं।

आबादी में आगे, लेकिन सत्ता में भागीदारी कम

ब्राह्मण विधायकों की इस नाराजगी को महज एक अफवाह मानकर खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी करीब 10-11 फीसदी मानी जाती है, जबकि ठाकुरों की हिस्सेदारी लगभग 6-7 फीसदी है। लेकिन जब सत्ता में प्रतिनिधित्व की बात आती है, तो कम आबादी वाले ठाकुर समुदाय का पलड़ा भारी नजर आता है।

ये आंकड़े आपको भी कर देंगे हैरान

यूपी विधानसभा और विधान परिषद में भाजपा के प्रतिनिधित्व के आंकड़े इस असंतोष की असली वजह स्पष्ट करते हैं:

  • विधानसभा: यूपी विधानसभा में भाजपा के कुल 258 विधायक हैं। इनमें से ठाकुर विधायकों की संख्या 45 है, जबकि आबादी में ज्यादा होने के बावजूद ब्राह्मण विधायकों की संख्या 42 ही है।
  • विधान परिषद: उच्च सदन में यह अंतर और ज्यादा दिखता है। भाजपा के 79 एमएलसी में से 23 ठाकुर समाज से आते हैं, जबकि ब्राह्मण एमएलसी की संख्या केवल 14 है।

इसके अलावा ओबीसी के 84, अनुसूचित जाति के 59 और अन्य सवर्ण जातियों के 28 विधायक हैं। साफ है कि संख्याबल में ज्यादा होने के बाद भी सदन के दोनों हिस्सों में ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व राजपूतों के मुकाबले कम है।

बीजेपी के लिए खतरे की घंटी?

सूत्रों का कहना है कि विधायकों की बैठक में समाज की भूमिका और घटते प्रतिनिधित्व पर गंभीर चर्चा हुई है। यह स्थिति भाजपा के लिए चिंताजनक है क्योंकि ब्राह्मण और ठाकुर दोनों ही पार्टी के कोर वोट बैंक माने जाते हैं। उधर, समाजवादी पार्टी भी इस मौके को भुनाने में लगी है और सरकार पर मुख्यमंत्री की जाति (ठाकुर) के लोगों को विशेष संरक्षण देने का आरोप लगाती रही है। मानसून सत्र के दौरान ठाकुर विधायकों की बैठक को जहां सीएम के प्रति एकजुटता माना गया था, वहीं ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने पार्टी के भीतर जातीय संतुलन साधने की चुनौती खड़ी कर दी है।

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Read More Articles

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)