होम सड़क हादसों पर लगेगा AI का ब्रेक: उत्तर प्रदेश बना देश का पहला राज्य, अब हादसों के असली कारण बताएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
उत्तर प्रदेश जल्द ही देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स का प्रयोग किया जाएगा। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को एनओसी (NOC) जारी कर दी है।
उत्तर प्रदेश जल्द ही देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स का प्रयोग किया जाएगा। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को एनओसी (NOC) जारी कर दी है। इस योजना के तहत अब हादसों के पीछे छिपे असली कारणों को तकनीकी तौर पर पहचाना जाएगा, जिससे भविष्य में दुर्घटनाएं रोकी जा सकेंगी।
आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से जून 2024 के बीच उत्तर प्रदेश में 25,830 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 14,205 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले 2023 में इसी अवधि में 12,043 मौतें दर्ज हुई थीं। सड़कें खराब इंजीनियरिंग, ड्राइवर की लापरवाही, मौसम, या तकनीकी गड़बड़ियों के कारण मौत का मैदान बन रही हैं, लेकिन आज तक इसका कोई सटीक विश्लेषण नहीं हो सका।
अभी तक हादसे के बाद पुलिस की मैन्युअल रिपोर्ट ही आधार बनती थी, जिससे असली कारण सामने नहीं आ पाते थे। इसी को बदलने के लिए अब इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की मदद ली जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर इस प्रोजेक्ट की नींव रखी गई है। इसका संचालन आइटीआई लिमिटेड और वैश्विक टेक-पार्टनर एमलोजिका करेंगे। सरकार ने इसके लिए वर्ष 2025-26 के बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत 6 सप्ताह में प्रारंभिक प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट तैयार किया जाएगा। इसमें विभिन्न स्रोतों से डेटा इकट्ठा कर एआई मॉडल तैयार किया जाएगा जो हादसों के कारणों, ब्लैकस्पॉट्स और रीयल टाइम पॉलिसी सुझाव दे सकेगा। इसमें मौसम, रोड कंडीशन, ड्राइवर की क्षमता और वाहन की तकनीकी स्थिति जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
भविष्य में यह तकनीक इतनी उन्नत हो सकती है कि अगर कोई दोपहिया चालक बिना हेलमेट के है तो एआई ट्रैफिक सिग्नल उसे ग्रीन सिग्नल ही नहीं देगा। साथ ही यह तकनीक उन स्थानों पर दोहराई जाने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में भी मददगार होगी।
प्रोजेक्ट के सफल होते ही इस मॉडल को फेसलेस ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट सिस्टम, ई-चालान, वाहन सारथी प्लेटफॉर्म, राजस्व वसूली और अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। इससे नियम उल्लंघन की पहचान, स्वचालित चालान, और टैक्स डिफॉल्ट पर स्वतः अलर्ट जैसी सुविधाएं संभव होंगी।
परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने कहा कि एआई की मदद से अब दुर्घटनाओं के सही कारण सामने आएंगे, जिससे उन्हें रोकने की रणनीति बनाई जा सकेगी। उन्होंने कहा:
"यूपी एआई से मार्ग दुर्घटनाएं रोकने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।"
सरकार डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा मानकों का निरंतर ऑडिट करेगी और रिपोर्ट को केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
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