होम क्या ईरान से होने वाला है बड़ा समझौता? ट्रंप ने बातचीत के बीच दी चेतावनी, बोले- ‘हमारी शर्तें नहीं मानी गईं तो...’
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी परमाणु मुद्दे पर बातचीत एक अहम मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है,
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी परमाणु मुद्दे पर बातचीत एक अहम मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका अपनी प्रमुख शर्तों पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और समझौते की संभावनाएं बन रही हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित डील की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह होगी कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करे।
उन्होंने कहा, "मेरे लिए सबसे बड़ी गारंटी यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे और उन्होंने इस बात पर सहमति जताई है."
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत को लेकर आशावाद व्यक्त करते हुए कहा कि जल्दबाजी में किया गया समझौता टिकाऊ नहीं होता। उनका कहना था कि धैर्यपूर्वक आगे बढ़ रही वार्ता अमेरिका को उसके अपेक्षित परिणामों तक पहुंचा सकती है।
ट्रंप ने कहा, "हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं. यदि आप जल्दबाजी करेंगे तो अच्छा समझौता नहीं कर पाएंगे. धीरे-धीरे हम उस दिशा में बढ़ रहे हैं जो हम चाहते हैं. अगर हमें वह नहीं मिला जो हम चाहते हैं, तो हम इसे किसी दूसरे तरीके से समाप्त करेंगे."
उनके इस बयान को ईरान के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के संबंधों में तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है तो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा सकता है।
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने अतीत में ईरान की नौसेना और वायुसेना को गंभीर नुकसान पहुंचाया था, लेकिन सेना के कुछ हिस्सों को पूरी तरह निशाना नहीं बनाया गया।
ट्रंप ने कहा, "उनकी नौसेना पूरी तरह खत्म हो चुकी है, सौ प्रतिशत. उनकी वायुसेना भी पूरी तरह खत्म हो चुकी है. लेकिन हमने उनकी सेना को कुछ हद तक छोड़ दिया, क्योंकि हमें लगता है कि सेना का एक हिस्सा अपेक्षाकृत मध्यम सोच रखता है."
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि किसी देश की पूरी व्यवस्था को नष्ट कर देना हमेशा सही रणनीति साबित नहीं होती। उनके अनुसार, इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां युद्ध के बाद पूरी व्यवस्था ध्वस्त होने से संबंधित देश दशकों तक सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाए।
उन्होंने कहा, "हमने उनके नेतृत्व के विभिन्न हिस्सों को निशाना बनाया, लेकिन सेना को पूरी तरह नहीं छुआ. लोगों को यह सुनकर आश्चर्य होगा. युद्धों में ऐसी गलतियां हुई हैं जहां सब कुछ खत्म कर दिया गया और फिर वह देश 40 वर्षों तक दोबारा खड़ा नहीं हो सका. आप इराक का उदाहरण देख सकते हैं."
अमेरिका और Iran के बीच जारी बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। यदि दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते पर पहुंचते हैं तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व की राजनीति बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
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