होम Trump Birthright Citizenship Order: भारतीय परिवारों पर कितना पड़ेगा असर? जानिए किसे राहत और किसके लिए बढ़ी मुश्किलें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बर्थराइट सिटिजनशिप (जन्मसिद्ध नागरिकता) और बर्थ टूरिज्म पर सख्ती लाने के उद्देश्य से दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन आदेशों का मकसद अमेरिका में केवल बच्चे को जन्म देकर नागरिकता हासिल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बर्थराइट सिटिजनशिप (जन्मसिद्ध नागरिकता) और बर्थ टूरिज्म पर सख्ती लाने के उद्देश्य से दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन आदेशों का मकसद अमेरिका में केवल बच्चे को जन्म देकर नागरिकता हासिल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। हालांकि, अमेरिका में वैध वीजा पर रह रहे भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों के लिए फिलहाल राहत की स्थिति बनी हुई है। दूसरी ओर, टूरिस्ट वीजा पर बच्चे के जन्म की योजना बनाने वालों के लिए नियम पहले से अधिक सख्त हो सकते हैं।
6 अगस्त 2027 को हस्ताक्षरित दो नए कार्यकारी आदेशों में पहला आदेश 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक लगाने से जुड़ा है। इसके तहत यदि किसी गर्भवती महिला के अमेरिका आने का उद्देश्य बच्चे को जन्म देकर उसे अमेरिकी नागरिकता दिलाना पाया जाता है, तो उसके विजिटर वीजा आवेदन पर कड़ी जांच होगी। संदेह होने पर वीजा आवेदन अस्वीकार या लंबित किया जा सकता है।
दूसरा आदेश उन श्रेणियों का विस्तार करता है, जिनके बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता के लिए अयोग्य माना जा सकता है। इनमें विदेशी राजनयिकों, 'एलियन एनिमी' घोषित व्यक्तियों, आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों, विदेशी सरकारों के लॉबिस्ट, धोखाधड़ी से नागरिकता प्राप्त करने वालों और कथित कमर्शियल बर्थ टूरिज्म के तहत अमेरिका पहुंचने वाली माताओं के बच्चे शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि ये आदेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले से टकराते नहीं हैं क्योंकि ये केवल सीमित श्रेणियों पर लागू होंगे।
30 जून 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पहले कार्यकारी आदेश को 6-3 के बहुमत से खारिज कर दिया था। उस आदेश में अवैध प्रवासियों और अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता से वंचित करने की कोशिश की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है, जो अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले लगभग हर व्यक्ति को नागरिकता का अधिकार देता है। इसके अलावा वर्ष 1898 के ऐतिहासिक United States v. Wong Kim Ark फैसले का भी हवाला दिया जाता है, जिसमें कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे गैर-नागरिक माता-पिता के यहां जन्मे बच्चे को अमेरिकी नागरिक माना गया था।
H-1B, L-1, O-1, F-1 या अन्य वैध वीजा पर अमेरिका में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं माना जा रहा है। ऐसे परिवारों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के तहत पहले की तरह जन्मसिद्ध नागरिकता मिलती रहेगी।
B1/B2 विजिटर वीजा पर अमेरिका जाने वाले भारतीय परिवारों को अब अधिक जांच का सामना करना पड़ सकता है। यदि अधिकारियों को संदेह हुआ कि यात्रा का उद्देश्य बच्चे को जन्म देना या बर्थ टूरिज्म है, तो अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, वीजा प्रक्रिया लंबी हो सकती है या आवेदन अस्वीकार भी किया जा सकता है। एयरपोर्ट पर भी पूछताछ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
व्हाइट हाउस के अनुसार भारत उन देशों में शामिल है, जहां से कुछ लोग अमेरिका में बच्चे के जन्म के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने के उद्देश्य से यात्रा करते हैं। नए आदेशों का सबसे बड़ा प्रभाव ऐसे मामलों पर पड़ सकता है। यदि किसी परिवार का उद्देश्य केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका जाना है, तो उनके लिए वीजा हासिल करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए कार्यकारी आदेशों को भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने इन्हें असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि जन्मसिद्ध नागरिकता अमेरिकी संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है और किसी कार्यकारी आदेश के जरिए इसे बदला नहीं जा सकता।
पूर्व बाइडेन प्रशासन की अधिकारी और UnidosUS से जुड़ी डेबोरा फ्लीशाकर ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जन्मसिद्ध नागरिकता राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर नहीं है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने नए आदेशों पर हस्ताक्षर के बाद कहा कि उन्हें विश्वास है कि ये आदेश संवैधानिक हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में नहीं आया था।
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