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समाचारदेश Alert Star Digital Team Jun 1, 2026 05:59 PM

सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकीलों पर रोक! गर्मी की छुट्टियों में जजों के फैसले ने सबको चौंकाया

सुप्रीम कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियों के दौरान सुनवाई को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान उनकी बेंच के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न तो मामलों का उल्लेख करने की अनुमति होगी और न ही वे दलीलें रख सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकीलों पर रोक! गर्मी की छुट्टियों में जजों के फैसले ने सबको चौंकाया

सुप्रीम कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियों के दौरान सुनवाई को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान उनकी बेंच के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न तो मामलों का उल्लेख करने की अनुमति होगी और न ही वे दलीलें रख सकेंगे। इस अवधि में केवल युवा वकील और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड ही अदालत के सामने पक्ष रख सकेंगे।

जस्टिस विक्रम नाथ ने सुनवाई शुरू होते ही किया ऐलान

सोमवार को कार्यवाही शुरू होने के साथ ही जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ शब्दों में कहा, 'मेरी अदालत में किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को अनुमति नहीं दी जाएगी.' उन्होंने जस्टिस पी. बी. वराले के साथ गठित बेंच की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की।

सुप्रीम कोर्ट में 1 जून से 12 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश की अवधि चल रही है, जिसे अब "आंशिक न्यायालय कार्य दिवस" के रूप में जाना जाता है। इस दौरान प्रत्येक सप्ताह तीन से चार बेंच आवश्यक मामलों की सुनवाई करती हैं।

सीनियर वकील को भी नहीं मिली छूट

सुनवाई के दौरान जब एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपने मामले का उल्लेख करने की कोशिश की तो जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट कर दिया कि इस अवधि में वरिष्ठ वकीलों को न तो मामलों की लिस्टिंग के लिए उल्लेख करने दिया जाएगा और न ही उन्हें बहस करने की अनुमति होगी।

जब वरिष्ठ वकील ने यह दलील दी कि उन्हें इस व्यवस्था की जानकारी नहीं थी और कम से कम आज के लिए उन्हें सुन लिया जाए, तब जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, 'आप एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड या निर्देश देने वाले वकील को बुलाइए. हम उन्हें सुनेंगे लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नही.'

युवा वकीलों को मिलेगा अवसर

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि आंशिक कार्य दिवसों के दौरान केवल युवा अधिवक्ताओं और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड को ही अदालत के समक्ष दलीलें रखने का अवसर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस कदम का उद्देश्य युवा वकीलों को अधिक न्यायिक अनुभव और अदालत में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर देना है।

जुलाई तक टल सकते हैं कई मामले

बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हो रहे हैं, उन्हें सीधे खारिज नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों को सुप्रीम कोर्ट के नियमित कार्य दिवस शुरू होने के बाद जुलाई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

इससे उन पक्षकारों को राहत मिली है जिनके मामलों में वरिष्ठ वकील पहले से नियुक्त हैं।

अन्य बेंचों ने भी अपनाया यही रुख

जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने भी इसी तरह का रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मामलों का उल्लेख करने या बहस करने की अनुमति नहीं होगी।

जस्टिस नरसिम्हा ने अदालत में मौजूद वकीलों से कहा, 'हम आज के लिए ही इसकी अनुमति दे रहे हैं लेकिन कल से वरिष्ठ अधिवक्ताओं को दलीलें रखने या मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. अगर कनिष्ठ अधिवक्ता मामलों में दलीलें रखते हैं तो नोटिस जारी होने की संभावना अधिक है और अगर वरिष्ठ अधिवक्ता दलीलें रखते हैं तो मामला खारिज होने की संभावना अधिक है.'

जस्टिस संजय करोल ने भी जताई सहमति

जस्टिस संजय करोल ने भी इसी प्रकार की टिप्पणी करते हुए युवा वकीलों को अवसर देने के पक्ष में अपना समर्थन जताया। उन्होंने जस्टिस ए. जी. मसीह के साथ गठित बेंच की अध्यक्षता करते हुए समान रुख अपनाया।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को कानूनी क्षेत्र में युवा वकीलों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जहां उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत में सीधे अपनी दलीलें रखने का मौका मिलेगा।

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