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समाचारदेशअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Jun 1, 2026 05:48 PM

होर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी चाल! आज से लागू हुई ओमान डील, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया सहारा

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार, 1 जून 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं,

होर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी चाल! आज से लागू हुई ओमान डील, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया सहारा

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार, 1 जून 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं, यह समझौता भारत के लिए व्यापारिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस डील के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को ओमान के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक पहुंच मिलेगी और निर्यात क्षेत्र को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पीयूष गोयल ने की CEPA लागू होने की घोषणा

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर भारत-ओमान CEPA के लागू होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए वैश्विक अवसरों के नए द्वार खोलेगा।

पीयूष गोयल ने कहा कि CEPA भारत के कारीगरों, किसानों, मछुआरों और MSMEs की समृद्धि के लिए नए रास्ते खोलने के नई दिल्ली के मिशन में एक मील का पत्थर साबित होगा.

उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते के माध्यम से भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध होंगे, निर्यात में वृद्धि होगी, निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा।

भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा

इस व्यापार समझौते के लागू होने के साथ ही भारत के श्रम-प्रधान उत्पादों को ओमान में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने लगेगा। इससे टेक्सटाइल, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, समुद्री उत्पाद और अन्य निर्यात आधारित क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के निर्यात कारोबार को नई गति मिलेगी और दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

होर्मुज तनाव के बीच क्यों अहम है यह समझौता?

भारत-ओमान CEPA ऐसे समय में लागू हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया की कुल दैनिक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत और समुद्री मार्ग से होने वाले वैश्विक तेल व्यापार का करीब 25 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है।

यही वजह है कि होर्मुज क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

ओमान की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए क्यों फायदेमंद?

विशेषज्ञों के अनुसार, ओमान की सबसे बड़ी ताकत उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है। जहां खाड़ी के कई देशों की समुद्री पहुंच सीधे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर है, वहीं ओमान का बड़ा समुद्री तट अरब सागर और ओमान की खाड़ी में स्थित है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर आता है।

इस कारण यदि भविष्य में होर्मुज क्षेत्र में कोई व्यवधान पैदा होता है, तब भी ओमान के कई प्रमुख बंदरगाहों के संचालन पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव पड़ सकता है। इससे भारत के लिए ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों ने बताया भरोसेमंद व्यापारिक गेटवे

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, सलालाह और दुक्म जैसे प्रमुख बंदरगाह होर्मुज क्षेत्र में किसी भी संभावित संकट के दौरान भी सामान्य रूप से काम करते रह सकते हैं। उनका मानना है कि क्षेत्रीय तनाव या अस्थिरता की स्थिति में ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापारिक और ऊर्जा गेटवे के रूप में उभर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि CEPA केवल एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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