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समाचारदेशविचारकानून Alert Star Digital Team Oct 27, 2025 04:45 PM

Supreme Court News: हम मोटी चमड़ी के लोग हैं.., सुप्रीम कोर्ट ने जूता उछालने वाले वकील पर अवमानना केस चलाने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई की ओर जूता उछालने की कोशिश करने वाले एडवोकेट राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना का मामला शुरू करने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को “इतनी तरजीह देने की ज़रूरत नहीं” है,

Supreme Court News: हम मोटी चमड़ी के लोग हैं.., सुप्रीम कोर्ट ने जूता उछालने वाले वकील पर अवमानना केस चलाने से किया इनकार

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई की ओर जूता उछालने की कोशिश करने वाले एडवोकेट राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना का मामला शुरू करने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को “इतनी तरजीह देने की ज़रूरत नहीं” है, क्योंकि वह पूरी न्यायिक व्यवस्था में कहीं मायने नहीं रखता.

“जज मोटी चमड़ी के लोग हैं” – जस्टिस सूर्यकांत

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि, “जज मोटी चमड़ी के लोग हैं, जो ऐसी चीजों से प्रभावित नहीं होते.” उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट को इस तरह की हरकतों पर प्रतिक्रिया देकर उन्हें महत्व नहीं देना चाहिए.

जस्टिस सूर्यकांत, जो सीजेआई गवई के बाद सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज हैं और अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में नामित किए गए हैं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ इस मामले की सुनवाई कर रहे थे.

SCBA अध्यक्ष ने की अवमानना की मांग

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि राकेश किशोर को नोटिस जारी किया जाना चाहिए क्योंकि यह संस्था के सम्मान का मामला है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट का मज़ाक बनाया जा रहा है और आरोपी वकील लगातार असम्मानजनक बयान दे रहा है.

इस पर बेंच ने कहा कि “चीफ जस्टिस ने खुद मामले को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया. आखिर उस वकील को इतनी तरजीह क्यों दी जाए? उसने सिर्फ मीडिया में आकर्षण पाने के लिए बयान दिए हैं. अगर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई तो वह और बयान देगा.”

विकास सिंह और कोर्ट के बीच हुई बहस

विकास सिंह ने तर्क दिया कि यह केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि संस्था के सम्मान का मामला है. इस पर जजों ने कहा कि अदालत भविष्य के लिए कुछ दिशानिर्देश ज़रूर जारी करेगी, लेकिन किसी एक व्यक्ति को लेकर कदम उठाना उचित नहीं होगा.

विकास सिंह ने कहा, “अगर उसी दिन वकील को जेल भेजा जाता, तो वह ऐसे बयान नहीं देता.”
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी जजों की राय से सहमति जताते हुए कहा कि “उस व्यक्ति को सोशल मीडिया पर जो जगह मिल रही है, वह अस्थायी है. उस पर कार्रवाई करने से वह खुद को पीड़ित दिखाकर और ध्यान आकर्षित करेगा.”

विकास सिंह ने तर्क दिया कि कोई कार्रवाई न करना ऐसे दुस्साहस को बढ़ावा देगा. इस पर अदालत ने कहा कि वह इस मामले को फिलहाल बंद नहीं कर रही है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत (guidelines) तय करने पर विचार करेगी.

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