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समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Jan 26, 2026 06:55 PM

ऋषि और कृषि से छेड़छाड़ भारी पड़ेगी, शंकराचार्य विवाद में कूदे राकेश टिकैत, सरकार को दे दी बड़ी चेतावनी

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गंगा स्नान से रोकने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस धार्मिक विवाद में अब सियासी और सामाजिक संगठनों की भी एंट्री हो गई है.

ऋषि और कृषि से छेड़छाड़ भारी पड़ेगी, शंकराचार्य विवाद में कूदे राकेश टिकैत, सरकार को दे दी बड़ी चेतावनी

मुजफ्फरनगर: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गंगा स्नान से रोकने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस धार्मिक विवाद में अब सियासी और सामाजिक संगठनों की भी एंट्री हो गई है. सोमवार (26 जनवरी 2026) को गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इस मुद्दे पर सरकार को कड़ी नसीहत दी है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि संतों की नाराजगी देश के लिए शुभ संकेत नहीं है.

'शंकराचार्य को स्नान करने दें, वरना...'

जनपद के पुरकाजी क्षेत्र में आयोजित एक भव्य गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत के दौरान प्रयागराज विवाद पर अपनी बेबाक राय रखी. उन्होंने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि शंकराचार्य को स्नान की अनुमति दी जानी चाहिए. टिकैत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "शंकराचार्य जी को स्नान करवा देना चाहिए क्योंकि अगर संत, किसान नाराज होंगे तो देश को भारी पड़ेगा. यह देश ऋषि और कृषि का देश है, जब-जब ऋषि और कृषि के साथ छेड़खानी होगी तो हलचल पैदा होगी."

ऋषि और कृषि के अपमान पर भड़के टिकैत

किसान नेता ने इस मुद्दे को सीधे देश की संस्कृति और किसानों से जोड़ दिया. उनका कहना है कि भारत की पहचान उसके ऋषियों (संतों) और कृषि (किसानों) से है. अगर इन दोनों वर्गों के साथ कोई भी छेड़छाड़ या अपमान होता है, तो देश में अस्थिरता पैदा होना तय है. टिकैत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब शंकराचार्य के अपमान को लेकर हिंदू संगठनों में पहले से ही आक्रोश है.

आखिर क्या है पूरा विवाद?

गौरतलब है कि यह पूरा बवाल मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था. प्रयागराज प्रशासन का आरोप है कि अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों से वीआईपी प्रोटोकॉल संभव नहीं था, लेकिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके करीब 200 समर्थक बिना पूर्व अनुमति के पालकी लेकर स्नान घाट की तरफ बढ़े और बैरिकेडिंग तोड़ दी. वहीं, शंकराचार्य का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें और उनके अनुयायियों को जानबूझकर रोका और अपमानित किया. अब राकेश टिकैत के बयान के बाद इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है.

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