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समाचारदेशराजनीति Alert Star Digital Team Aug 12, 2025 04:32 PM

2027 के रण में फिर साथ दिखेंगे राहुल-अखिलेश, संसद से सड़क तक कायम ‘दो लड़कों की जोड़ी’

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भले ही सपा और कांग्रेस के रिश्तों में खटास की अटकलें तेज थीं, लेकिन हालिया सियासी घटनाओं ने तस्वीर बदल दी है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़ी संसद से लेकर सड़क तक एकजुट नजर आ रही है और मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही है।

2027 के रण में फिर साथ दिखेंगे राहुल-अखिलेश, संसद से सड़क तक कायम ‘दो लड़कों की जोड़ी’

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भले ही सपा और कांग्रेस के रिश्तों में खटास की अटकलें तेज थीं, लेकिन हालिया सियासी घटनाओं ने तस्वीर बदल दी है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़ी संसद से लेकर सड़क तक एकजुट नजर आ रही है और मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही है। यह संकेत साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी ‘दो लड़कों की जोड़ी’ साथ मैदान में उतरेगी।

2024 में बनाई बीजेपी को घेरने की रणनीति

लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी ने उत्तर प्रदेश में ऐसा सियासी समीकरण बनाया कि बीजेपी बहुमत से दूर रह गई। बीजेपी को सहयोगियों के सहारे सरकार बनानी पड़ी। सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीतकर बीजेपी के 33 सीटों तक सिमटने में अहम भूमिका निभाई। राहुल का “संविधान बचाओ” और आरक्षण का नैरेटिव, साथ ही अखिलेश का पीडीए फॉर्मूला, बीजेपी के लिए भारी पड़ा।

संसद में एक सुर, सड़क पर एक साथ

मॉनसून सत्र में दोनों नेताओं ने बिहार में हो रहे वोटर वेरिफिकेशन और एसआईआर प्रक्रिया का विरोध किया। राहुल गांधी ने चुनाव में “वोट चोरी” का मुद्दा उठाया, तो अखिलेश यादव ने खुलकर उनका साथ दिया। संसद से बाहर भी दोनों नेताओं ने विरोध मार्च में कंधे से कंधा मिलाकर हिस्सा लिया।

राजनीतिक नजदीकियों का बढ़ना

राहुल गांधी के 7 अगस्त के डिनर में अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव के साथ पहुंचे, जबकि पहले वे कांग्रेस की डिनर पार्टी में खुद शामिल होने के बजाय प्रतिनिधि भेजते थे। यही नहीं, संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान अखिलेश ने पुलिस बैरिकेड तक फांद दिया, वहीं प्रियंका गांधी और डिंपल यादव ने विपक्षी नेताओं का हौसला बढ़ाया।

चुनावी तालमेल का पुराना इतिहास

2024 में गठबंधन के दौरान ही दोनों दलों के नेता एक-दूसरे के समर्थन में सक्रिय दिखे। राहुल गांधी कन्नौज में अखिलेश के लिए प्रचार करने पहुंचे, तो अखिलेश ने रायबरेली में राहुल के लिए रैली की। इस तालमेल का असर सीधे नतीजों में दिखा।

रिश्तों में आई दरार और फिर पटरी पर वापसी

चुनाव के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र और यूपी उपचुनाव के नतीजों से रिश्तों में खटास की चर्चा होने लगी थी। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान ने भी सवाल खड़े किए। संभल हिंसा और इंडिया गठबंधन के नेतृत्व पर भी मतभेद सामने आए। लेकिन वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के मुद्दे पर राहुल-अखिलेश की एकजुटता ने यह संदेश दिया कि 2027 तक उनका साथ जारी रहेगा।

2027 की सियासत में होगी साझेदारी?

अखिलेश यादव अब कांग्रेस के साथ मिलकर यूपी की सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं, वहीं कांग्रेस भी सपा के सहारे अपनी सियासी ताकत बढ़ाने के मूड में है। दोनों नेताओं के हालिया कदम यह साफ करते हैं कि 2027 में ‘दो लड़कों की जोड़ी’ फिर मैदान में नजर आएगी।

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