होम पाकिस्तान पर गंभीर आरोप, 500 से ज्यादा अल्पसंख्यक लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन, मानवाधिकार रिपोर्ट से मचा हड़कंप

समाचारविदेश Alert Star Digital Team Mar 18, 2026 08:47 PM

पाकिस्तान पर गंभीर आरोप, 500 से ज्यादा अल्पसंख्यक लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन, मानवाधिकार रिपोर्ट से मचा हड़कंप

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पाकिस्तान पर गंभीर आरोप, 500 से ज्यादा अल्पसंख्यक लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन, मानवाधिकार रिपोर्ट से मचा हड़कंप

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (VOPM) ने दावा किया है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच ऐसे कुल 515 मामले दर्ज किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े केवल संख्या नहीं बल्कि हर मामले के पीछे एक परिवार की पीड़ा और भय की कहानी छिपी है। संगठन ने कहा कि “एक डरी हुई लड़की, एक तबाह परिवार, और एक ऐसा समुदाय जो लगातार डर के साए में जी रहा है.”

किन समुदायों की लड़कियां सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़ितों में सबसे बड़ी संख्या हिंदू समुदाय की लड़कियों की है। आंकड़ों के मुताबिक 69 प्रतिशत पीड़ित हिंदू लड़कियां हैं, जबकि 31 प्रतिशत ईसाई समुदाय से संबंधित हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में सिख लड़कियों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

वीओपीएम ने कहा, “ये आंकड़े उन अल्पसंख्यक समुदायों की कमजोरी को दिखाते हैं जो पहले से ही समाज के हाशिए पर जी रहे हैं. जब किसी समुदाय के पास सामाजिक रसूख और संस्थागत सुरक्षा नहीं होती, तो उसके सबसे कमजोर सदस्यों -- खासकर युवतियों -- को अक्सर सबसे ज्यादा खतरों का सामना करना पड़ता है.”

नाबालिग पीड़ितों की संख्या ने बढ़ाई चिंता

मानवाधिकार संस्था ने पीड़ितों की उम्र को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक 52 प्रतिशत पीड़ित लड़कियां 14 से 18 वर्ष के बीच की हैं, जबकि लगभग 20 प्रतिशत पीड़ित 14 साल से कम उम्र की हैं।

संस्था ने कहा कि ऐसे मामलों में परिवारों को अक्सर यह बताया जाता है कि लड़की ने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन या विवाह किया है, जिससे यह सवाल उठता है कि जब पीड़ित नाबालिग हों तो उनकी ‘मर्जी’ को कैसे वैध माना जा सकता है।

जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के आरोप

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से आरोप लगाया है कि कई मामलों में लड़कियों को बहला-फुसलाकर या दबाव डालकर धर्म परिवर्तन और विवाह के लिए मजबूर किया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि अल्पसंख्यक परिवारों के पास अक्सर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए न संसाधन होते हैं और न ही प्रभावशाली समर्थन।

कुछ मामलों में पाकिस्तानी अदालतों द्वारा ऐसे विवाह और धर्म परिवर्तन को वैध ठहराए जाने की बात भी सामने आई है, जिससे प्रभावित परिवार खुद को असहाय महसूस करते हैं।

अन्य संस्थाओं ने भी दर्ज किए सैकड़ों मामले

रिपोर्ट में पाकिस्तान की मानवाधिकार संस्था सेंटर फॉर सोशल जस्टिस (CSJ) का भी उल्लेख किया गया है, जिसने अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के सैकड़ों मामलों को दस्तावेज किया है। इनमें कई पीड़ित नाबालिग बताई गई हैं।

कानून सख्त करने और जवाबदेही तय करने की मांग

वीओपीएम ने इस मुद्दे पर सख्त कानून, पारदर्शी जांच और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। संगठन ने कहा, “ये आंकड़े बताते हैं कि इसे लेकर कानून को और सख्त करने की जरूरत है, साथ ही विभिन्न जिम्मेदार संस्थाओं की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. इस मुद्दे पर चुप्पी सबसे ज्यादा परेशान करती है. कोई मामला मीडिया या सोशल नेटवर्क पर कुछ समय के लिए तो हंगामा खड़ा कर सकता है, लेकिन जल्द ही ठंडा भी पड़ जाता है. उसकी जगह कोई दूसरी कहानी ले लेती है, और पिछले पीड़ित चुपचाप लोगों की बातचीत से गायब हो जाते हैं. इस बीच, यह सिलसिला चलता रहता है.”

आगे कहा गया, “यह चुप्पी अल्पसंख्यकों को अलग-थलग कर देती है. इसमें एक दर्दनाक संदेश छिपा है (चाहे जान-बूझकर हो या अनजाने में) वो ये कि उनकी पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा या उनके साथ कोई सहानुभूति नहीं दिखा रहा.”

संगठन ने जोर देते हुए कहा, “इसके लिए नाबालिगों को मजबूत कानूनी सुरक्षा, पारदर्शी जांच, दोषियों की जवाबदेही और कमजोर समुदायों के लिए सार्थक सुरक्षा उपायों की जरूरत है. सबसे बढ़कर, इसके लिए समाज को पीड़ितों और उनके परिवारों की आवाज सुनने की जरूरत है—ऐसी आवाजें जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं.”

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