होम नोएडा में मजदूरों का विस्फोटक प्रदर्शन, सड़कों पर उतरी मेड्स, ट्रंप से लेकर महंगाई तक - क्या है असली वजह?
नोएडा में शुरू हुआ मजदूरों का प्रदर्शन अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। पहले जहां सिर्फ फैक्ट्रियों के मजदूर कम वेतन और लंबे काम के घंटों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, वहीं अब उनके समर्थन में हाउस हेल्प यानी घरों में काम करने वाली महिलाएं भी उतर आई हैं।
नोएडा में शुरू हुआ मजदूरों का प्रदर्शन अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। पहले जहां सिर्फ फैक्ट्रियों के मजदूर कम वेतन और लंबे काम के घंटों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, वहीं अब उनके समर्थन में हाउस हेल्प यानी घरों में काम करने वाली महिलाएं भी उतर आई हैं। इससे शहर में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं।
इस पूरे प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ी वजह कंपनियों का रवैया और मजदूरों की कम सैलरी मानी जा रही है। लंबे समय से कम वेतन पर काम कर रहे मजदूर बढ़ती महंगाई के चलते अब अपने खर्च पूरे नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनका गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय हालात ने भी इस संकट को गहरा किया है। अमेरिका-ईरान तनाव और खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम के कारण तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। इसका सीधा असर गरीब और निम्न आय वर्ग पर पड़ा है, जिससे उनके दैनिक खर्च कई गुना बढ़ गए हैं।
नोएडा के ज्यादातर मजदूर छोटे गैस सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं, जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होते। पहले ये सिलेंडर करीब 100 रुपये प्रति किलो में भर जाते थे, लेकिन अब या तो इनकी सप्लाई बंद हो गई है या फिर चार से पांच गुना महंगे दाम पर मिल रहे हैं। इससे मजदूरों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
इस पूरे मामले में हरियाणा सरकार का मजदूरी बढ़ाने का फैसला भी एक अहम कारण बना। 1 अप्रैल से हरियाणा में मजदूरी में करीब 35% तक की बढ़ोतरी हुई, जिससे वहां के मजदूर महंगाई से बेहतर तरीके से निपट पा रहे हैं। वहीं नोएडा के मजदूर पुरानी सैलरी पर ही काम कर रहे हैं, जिससे असंतोष और बढ़ गया।
तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाने-पीने की चीजों, सब्जियों और रोजमर्रा के खर्चों पर भी पड़ा है। ऐसे में कम सैलरी वाले मजदूरों के लिए जीवन यापन करना बेहद मुश्किल हो गया है।
मजदूरों के प्रदर्शन से फैक्ट्रियों का काम ठप हो गया है, वहीं हाउस हेल्प के विरोध के कारण आम लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं।
सरकार अब कंपनियों के साथ बातचीत कर मजदूरों के वेतन बढ़ाने और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। वहीं प्रदर्शन ने यह भी साफ कर दिया है कि वैश्विक घटनाओं का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है।
रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई और तेज हो सकती है। ऐसे में मजदूरों और आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ने की संभावना है।
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