होम 94 दिन में गेमचेंजर नितिन नवीन, 7 सांसद तोड़कर BJP में मिलाए, AAP की सियासत हिल गई
भारतीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां बीजेपी अध्यक्ष बनने के महज 94 दिनों के भीतर नितिन नवीन ने ऐसा दांव चला कि आम आदमी पार्टी (AAP) की कमर टूटती नजर आ रही है। राघव चड्ढा ने 6 अन्य सांसदों के साथ AAP छोड़ने का ऐलान कर पार्टी को बड़ा झटका दिया।
भारतीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां बीजेपी अध्यक्ष बनने के महज 94 दिनों के भीतर नितिन नवीन ने ऐसा दांव चला कि आम आदमी पार्टी (AAP) की कमर टूटती नजर आ रही है। राघव चड्ढा ने 6 अन्य सांसदों के साथ AAP छोड़ने का ऐलान कर पार्टी को बड़ा झटका दिया।
20 जनवरी 2026 को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन के नेतृत्व में यह अब तक का सबसे बड़ा दल-बदल माना जा रहा है, जिसमें AAP के 7 सांसद बीजेपी में शामिल हो गए।
यह पूरा घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का नतीजा बताया जा रहा है।
सबसे पहले 20 जनवरी 2026 को नितिन नवीन ने बीजेपी अध्यक्ष पद की कमान संभाली। इसके बाद धीरे-धीरे आम आदमी पार्टी के अंदर मतभेद खुलकर सामने आने लगे। राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ीं, खासकर तब जब उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया गया।
इस पर चड्ढा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें 'चुप करा दिया गया, हराया नहीं.' इसके बाद पार्टी के अंदर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ, जिसमें चड्ढा पर पार्टी लाइन से हटकर काम करने के आरोप लगाए गए।
AAP का आरोप है कि इसी दौरान केंद्रीय एजेंसियों जैसे ED और CBI का इस्तेमाल कर सांसदों पर दबाव बनाया गया, जिसे पार्टी ने ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया।
अंततः 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की कि वह और 6 अन्य सांसद AAP छोड़कर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत बीजेपी में विलय कर रहे हैं।
राघव चड्ढा ने अपने फैसले को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने 'खून-पसीने' से सींचा, वह अब 'भ्रष्ट और समझौतावादी लोगों के हाथों की कठपुतली बन गई है.'
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खुद को पार्टी गतिविधियों से इसलिए दूर कर लिया क्योंकि 'मैं उनके अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहता था.' चड्ढा के अनुसार उनके सामने दो ही विकल्प थे—या तो राजनीति छोड़ दें या फिर अपनी ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक राजनीति के लिए करें।
आम आदमी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी की साजिश करार दिया है। पार्टी नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने ED और CBI का दुरुपयोग कर ‘ऑपरेशन लोटस’ को अंजाम दिया है।
उन्होंने कहा कि यह पंजाब की जनता के जनादेश के साथ 'विश्वासघात' है और जनता इन 'गद्दारों' को कभी माफ नहीं करेगी। संजय सिंह ने यह भी कहा कि पार्टी ने राघव चड्ढा को विधायक से सांसद तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
यह दल-बदल आम आदमी पार्टी के लिए गहरा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। राज्यसभा में AAP के पास पहले 10 सांसद थे, लेकिन 7 के जाने के बाद अब केवल 3 सदस्य ही बचे हैं। इससे उच्च सदन में पार्टी की ताकत लगभग खत्म हो गई है।
इतने बड़े स्तर पर दल-बदल से AAP के राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। साथ ही, पंजाब जो इस समय AAP का एकमात्र सत्ताधारी राज्य है, वहां 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम पार्टी के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
इतने बड़े नेताओं के जाने से जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है और बीजेपी का ‘बाहरी पार्टी’ वाला आरोप भी और मजबूत हो सकता है।
यह पूरा घटनाक्रम जहां बीजेपी की रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बता रहा है। आने वाले समय में इसका सबसे बड़ा असर पंजाब की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की एकजुटता पर देखने को मिल सकता है।
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