होम Mamata Banerjee Security Row: ममता की सुरक्षा पर सियासी संग्राम, TMC के आरोपों के बीच रिजू दत्ता ने खोली नई बहस
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया है कि उनकी सुरक्षा में लंबे समय से तैनात कर्मियों को हटाकर राज्य सरकार ने राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई की है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया है कि उनकी सुरक्षा में लंबे समय से तैनात कर्मियों को हटाकर राज्य सरकार ने राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई की है। वहीं, पार्टी से निलंबित नेता रिजू दत्ता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ममता बनर्जी की सुरक्षा में किसी तरह की कोई कमी नहीं की गई है।
तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा कर दावा किया कि ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है। पार्टी का कहना है कि उनकी सुरक्षा में कई वर्षों से तैनात कर्मियों को हटा दिया गया, जिसे वह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक मंशा से जुड़ा कदम मानती है।
टीएमसी ने कहा कि यह कदम उन्हें अलग-थलग करने और संभावित खतरे में डालने की एक सोची-समझी कोशिश जैसा प्रतीत होता है। पार्टी के अनुसार, सुरक्षा में तैनात कुछ कर्मी उस समय से उनके साथ थे जब ममता बनर्जी केंद्र सरकार में रेल मंत्री थीं।
टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी की सुरक्षा में करीब दो दशकों से तैनात निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSOs) को उनके कोलकाता स्थित आवास से हटा दिया गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 17 जून 2026 की रात कालीघाट स्थित आवास के प्रवेश द्वार पर कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था। इस दावे के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने इस मामले को राजनीतिक विवाद से ऊपर बताते हुए कहा कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा राज्य सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय से सुरक्षा में तैनात कर्मियों को अचानक हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या देर रात उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।
वहीं, टीएमसी नेता मदन मित्रा ने कहा कि भले ही ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन देश और दुनिया में उनकी पहचान और सम्मान को देखते हुए उन्हें उचित सुरक्षा मिलनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस विषय पर उनकी मुख्यमंत्री से कोई बातचीत नहीं हुई है।
दूसरी ओर, टीएमसी से निलंबित नेता रिजू दत्ता ने सुरक्षा में किसी तरह की चूक होने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ये कहना गलत बात है कि उनके (ममता बनर्जी के) घर के बाहर सुरक्षा तैनात नहीं है. ये बिल्कुल गलत बात है, झूठ बात है. क्विज मास्टर की तरफ से जो वीडियो वायरल किया गया था कि ममता बनर्जी की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है, तो मैं साफ कहूंगा कि ये पूरी तरह से झूठ है.”
रिजू दत्ता ने कहा कि ममता बनर्जी को पहले की तरह जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है और पुराने सुरक्षाकर्मियों की जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। उनके मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव को सुरक्षा में कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी को जेड कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है. उनके साथ कई पीएसओ 20 से 25 सालों से तैनात थे. मैं मानता हूं कि इतने लंबे समय में एक परिवार से रिश्ता बन जाता है. अब उनको हटा दिया गया ठीक है, लेकिन उनकी जगह नए PSOs भी तो भेज दिए गए हैं. तो ऐसे में ममता बनर्जी की सुरक्षा से समझौता तो हो नहीं रहा है. इस मामले में इमोशनली एक बात बनती है, लेकिन कानूनी तौर पर इसमें कुछ भी गलत नहीं है.”
ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर सामने आए इस विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां टीएमसी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, वहीं रिजू दत्ता जैसे नेता सुरक्षा में किसी तरह की चूक से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
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