होम माघ मेले में शंकराचार्य का रथ रोकने पर बवाल, पुलिस पर संतों को मारने का आरोप, सीएम योगी पर साधा निशाना
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं।
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। इसी बीच संगम नोज की ओर बढ़ रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रोक दिया। अधिकारियों ने अत्यधिक भीड़ को देखते हुए शंकराचार्य से रथ से उतरकर पैदल आगे बढ़ने का आग्रह किया, लेकिन उनके समर्थक इसके लिए तैयार नहीं हुए। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस व समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति को संभालने में जुटे हैं।
इस घटनाक्रम से बेहद नाराज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पुलिस और प्रशासन पर संतों के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने मौके पर मौजूद मीडिया और अधिकारियों के सामने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, "बड़े-बड़े अधिकारी संत को मार रहे हैं. पुलिस वाले संत को मार रहे है, संत को मारा जा रहा है. प्रशासन को हमने कहा हम सहयोग करने को तैयार हैं, प्रशासन ने बोला है आप लोग रुक जाइए. हम लोग अब स्नान करने नहीं जा रहे हैं."
विवाद बढ़ने पर शंकराचार्य ने स्नान करने की जिद ठान ली और प्रशासन को खुली चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे वापस लौटने को राजी हुए तो पुलिस ने संतों के साथ अभद्रता की।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "जब प्रशासन ने हमसे कहा कि आप रुक जाइए तो हम लौटने लगे, लेकिन जब हम लौटने लगे तो वो हमारे संतों को मारने लगे. लेकिन हमने तय किया था कि हम वापस जाएंगे लेकिन अब हम कहीं नहीं जाएंगे स्नान करेंगे, हमें रोक सकते हैं तो रोक लें."
शंकराचार्य ने इस घटना को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया और सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिया। उन्होंने कहा, "इनको ऊपर से आदेश होगा ये सीएम योगी आदित्यनाथ के इशारे पर हो रहा होगा. हमने कुम्भ मेले में उनको जिम्मेदार ठहराया था तो वो बदला लेने के लिए कर रहें हैं या उनको खुश करने के लिए अधिकारी हमारा अपमान कर रहे होंगे."
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