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प्रादेशिकीबिहार Alert Star Digital Team Jul 18, 2025 01:16 PM

Lalu Yadav को सुप्रीम कोर्ट से झटका, लैंड फॉर जॉब घोटाले पर रोक से इनकार, हाई कोर्ट में रखनी होगी बात

‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में फंसे आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उन्होंने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने और एफआईआर व चार्जशीट को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी।

Lalu Yadav को सुप्रीम कोर्ट से झटका, लैंड फॉर जॉब घोटाले पर रोक से इनकार, हाई कोर्ट में रखनी होगी बात

‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में फंसे आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उन्होंने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने और एफआईआर व चार्जशीट को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह कहते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया कि यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है, पहले वहीं याचिका पर फैसला कराया जाए।

हाई कोर्ट पहले ही सुन चुका है मामला, सीबीआई को नोटिस जारी

बता दें कि 29 मई को दिल्ली हाई कोर्ट ने मुकदमे पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग पर सीबीआई को नोटिस जारी किया था। इसका मतलब यह है कि लालू यादव की याचिका अभी हाई कोर्ट में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है।

क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे।
आरोप है कि उन्होंने रेलवे की ग्रुप D नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली, और वह जमीन अपने परिवार और करीबी सहयोगियों के नाम पर ट्रांसफर करवाई गई।
मई 2022 में दर्ज एफआईआर में लालू के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी और अन्य पारिवारिक सदस्यों के नाम भी शामिल हैं।

लालू ने क्या मांगा था?

लालू प्रसाद यादव ने याचिका में मांग की थी कि निचली अदालत में चल रही कार्रवाई पर तत्काल रोक लगे। उन्होंने 2022, 2023 और 2024 में दायर चार्जशीट्स को रद्द करने की भी अपील की थी।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि एफआईआर में 14 साल की देरी की गई है, जबकि पहले इस मामले में प्राथमिक जांच हो चुकी थी जिसे बंद कर दिया गया था।

लालू की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17A के तहत किसी भी कार्रवाई के लिए पहले अनुमति लेनी होती है, जो इस केस में नहीं ली गई।

CBI का जवाब – यह मामला धारा 17A के दायरे में नहीं

CBI के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कोर्ट में कहा कि यह मामला धारा 17A के तहत नहीं आता, और लालू यादव को इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने दी निचली अदालत में पेशी से छूट

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को एक राहत यह दी कि उन्हें निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मिल गई है। कोर्ट ने हाई कोर्ट से आग्रह किया है कि वह इस मामले में जल्द निर्णय करे और फैसला देते समय पहले की गई टिप्पणियों को नजरअंदाज करे।

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