होम अचानक इस्तीफ़ा! स्वास्थ्य कारण या कुछ और? उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े से सियासी हलचल तेज़
सोमवार की देर शाम एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजे पत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए त्यागपत्र सौंपा।
नई दिल्ली। सोमवार की देर शाम एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजे पत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए त्यागपत्र सौंपा। लेकिन इस फैसले के पीछे केवल स्वास्थ्य ही वजह है या कुछ और, इस पर विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हुआ था। उसी दिन धनखड़ ने राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन पूरी सामान्यता के साथ किया।
उन्होंने पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि दी, नए सदस्यों को शपथ दिलाई, और विपक्ष द्वारा पेश किए गए 18 स्थगन प्रस्तावों को ख़ारिज कर दिया।
इन प्रस्तावों में पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, और बिहार की मतदाता सूची समीक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
इसके बाद विपक्ष के जोरदार विरोध और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
लंच के बाद जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तो जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव विपक्ष ने पेश किया।
धनखड़ ने इसे सदन में पढ़ा और राज्यसभा महासचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए।
जस्टिस वर्मा पर आरोप है कि उनके दिल्ली स्थित आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी, और 14 मार्च को उसी घर के एक स्टोर रूम में आग लग गई थी।
सोमवार दोपहर 3:53 बजे पीआईबी (प्रेस सूचना ब्यूरो) की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति आई, जिसमें कहा गया कि धनखड़ 23 जुलाई को जयपुर दौरे पर जाएंगे और रामबाग़ पैलेस में क्रेडाई (CREDAI) राजस्थान के नए पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
लेकिन शाम होते-होते सबको चौंकाते हुए उन्होंने अपना इस्तीफ़ा भेज दिया।
अपने पत्र में उन्होंने लिखा,
"राष्ट्रपति जी, स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूँ।"
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्रिपरिषद का भी आभार जताया।
धनखड़ के इस्तीफ़े के कुछ समय बाद कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:
"उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति का अचानक इस्तीफा जितना चौंकाने वाला है, उतना ही अकल्पनीय भी है। आज शाम करीब 5 बजे तक मैं उनके साथ था, वहां कई अन्य सांसद भी साथ थे, और शाम 7:30 बजे मेरी उनसे फोन पर बातचीत भी हुई थी।"
धनखड़ का 10 जुलाई का एक भाषण अब वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था,
"मैं सही समय पर, अगस्त 2027 में रिटायर होऊंगा बशर्ते भगवान की कृपा रहे।"
हालांकि पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वास्थ्य कारणों का उल्लेख किया है और इससे पहले मार्च में वे दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में एंजियोप्लास्टी भी करवा चुके थे। इलाज के बाद भी वे संसद में पूरी तरह सक्रिय थे।
धनखड़ का अचानक इस्तीफ़ा सियासी गलियारों में हलचल मचा चुका है।
हालांकि अभी राष्ट्रपति भवन या सरकार की ओर से कोई अन्य प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि उपराष्ट्रपति का पद अब किसे सौंपा जाएगा और क्या वाकई कारण केवल स्वास्थ्य ही था।
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