होम न्यूजीलैंड से फ्री ट्रेड डील: 9 महीने में हुई डील, अब 20 अरब डॉलर निवेश और 100% ड्यूटी खत्म
भारत और New Zealand के बीच 27 अप्रैल को एक अहम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हो गए हैं। नई दिल्ली और वेलिंगटन की टीमों ने दिसंबर 2025 में इस समझौते पर बातचीत पूरी कर ली थी, जिसके बाद अब इसे औपचारिक रूप दिया गया।
भारत और New Zealand के बीच 27 अप्रैल को एक अहम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हो गए हैं। नई दिल्ली और वेलिंगटन की टीमों ने दिसंबर 2025 में इस समझौते पर बातचीत पूरी कर ली थी, जिसके बाद अब इसे औपचारिक रूप दिया गया। इस व्यापक समझौते में कुल 20 चैप्टर शामिल हैं, जिनमें वस्तुओं का व्यापार, विवाद निपटान, कानूनी ढांचा और अन्य महत्वपूर्ण पहलू शामिल किए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि यह समझौता केवल 9 महीनों में पूरा हो गया, जो दोनों देशों के बीच मजबूत भरोसे और साझा उद्देश्यों को दर्शाता है। उन्होंने इसे “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और यह भी कहा कि पिछले चार वर्षों में यह उनका सातवां ट्रेड एग्रीमेंट है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि यह समझौता किसानों, युवाओं, महिलाओं, MSME सेक्टर, कारीगरों, स्टार्टअप और छात्रों के लिए फायदेमंद साबित होगा। इससे नए अवसर पैदा होंगे और कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। वहीं न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon ने कहा कि यह डील उनके देश के लिए एक नया और “डायनेमिक” बाजार खोलेगी और एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद करेगी।
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा। साथ ही भारत के सभी निर्यात पर न्यूजीलैंड में 100% ड्यूटी खत्म कर दी जाएगी, जिससे भारतीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा।
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए हर साल कम से कम 5,000 वीजा जारी किए जाएंगे, जिससे वे न्यूजीलैंड में तीन साल तक काम कर सकेंगे। यह कदम रोजगार के नए अवसर खोलने में मदद करेगा।
टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे भारतीय उत्पाद अब न्यूजीलैंड में बिना किसी ड्यूटी के पहुंचेंगे। दूसरी ओर भारत ने अपनी 70% टैरिफ लाइन्स न्यूजीलैंड के लिए खोल दी हैं, जिससे वहां के उत्पादों को भी भारतीय बाजार में जगह मिलेगी।
न्यूजीलैंड को ऊन, वाइन, लकड़ी, कोयला और फलों जैसे एवोकाडो और ब्लूबेरी के निर्यात में फायदा होगा। वहीं इस समझौते के जरिए कृषि क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ेगा। भारतीय किसानों को कीवी और सेब की खेती में मदद मिलेगी और शहद उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
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