होम जंग के बीच भारत को बड़ी राहत, ईरान से फिर तेल खरीदेगा भारत? अमेरिका के यू-टर्न से बदला समीकरण
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा मोर्चे पर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन ने अचानक नीति में बदलाव करते हुए ईरानी तेल पर अस्थायी छूट दे दी है। इसके बाद भारतीय रिफाइनर दोबारा ईरान से कच्चा तेल खरीदने की तैयारी में जुट गए हैं।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा मोर्चे पर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन ने अचानक नीति में बदलाव करते हुए ईरानी तेल पर अस्थायी छूट दे दी है। इसके बाद भारतीय रिफाइनर दोबारा ईरान से कच्चा तेल खरीदने की तैयारी में जुट गए हैं। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर है और एशियाई देश वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाश रहे हैं।
तीन भारतीय रिफाइनिंग सूत्रों के अनुसार, कंपनियां ईरानी तेल खरीदने की योजना बना रही हैं, लेकिन अंतिम निर्णय से पहले सरकार के निर्देश और अमेरिका की ओर से भुगतान व्यवस्था से जुड़ी शर्तों पर स्पष्टता का इंतजार किया जा रहा है। सीमित रणनीतिक तेल भंडार वाले भारत ने हाल ही में अमेरिकी छूट मिलने के बाद रूसी तेल की खरीद भी तेज कर दी थी।
अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी तेल खरीद पर 30 दिनों की अस्थायी छूट प्रदान की है। स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, यह राहत उन तेल खेपों पर लागू होगी जो 20 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुकी हैं और 19 अप्रैल तक डिलीवर की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 2018 में ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन अब उसी प्रशासन द्वारा दी गई यह अस्थायी राहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा नीति बदलाव मानी जा रही है।
भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य देशों की रिफाइनरियां भी यह आकलन कर रही हैं कि वे ईरानी तेल खरीद सकती हैं या नहीं। हॉर्मुज जलसंधि में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण कई रिफाइनरियां कम क्षमता पर काम कर रही हैं और ईंधन निर्यात में कटौती करनी पड़ रही है।
जानकारी के मुताबिक करीब 170 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल फिलहाल समुद्र में जहाजों पर संग्रहित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्टॉक अल्पकालिक राहत तो दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि के समाधान के लिए पर्याप्त नहीं होगा। एशिया अपनी लगभग 60 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है, जिससे स्थिति और संवेदनशील बनी हुई है।
2018 में प्रतिबंध लागू होने के बाद चीन ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बनकर उभरा। आंकड़ों के अनुसार, उसके स्वतंत्र रिफाइनरों ने पिछले वर्ष औसतन 13.8 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा, क्योंकि प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल अपेक्षाकृत सस्ते दामों पर उपलब्ध था।
हालांकि ईरानी तेल खरीद की राह पूरी तरह आसान नहीं है। भुगतान व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता, पुराने जहाजों का इस्तेमाल और तीसरे पक्ष के व्यापारियों के जरिए बिक्री जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। पहले जहां खरीदार सीधे नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी से अनुबंध करते थे, अब अधिकांश सौदे मध्यस्थ कंपनियों के माध्यम से हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग और नियामकीय प्रक्रियाओं को समझने में समय लग सकता है, लेकिन कंपनियां जल्द निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
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