होम Deepfake पर अब नहीं चलेगा खेल, डिजिटल पहचान बचाने के लिए सरकार ला रही नया सख्त कानून
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए नकली वीडियो, तस्वीरें और ऑडियो – यानी डीपफेक (Deepfake) – अब दुनियाभर की सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। यह तकनीक जहां मनोरंजन में इस्तेमाल होती है, वहीं इसका दुरुपयोग कर लोगों की पहचान, प्रतिष्ठा और गोपनीयता पर हमला भी किया जा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए नकली वीडियो, तस्वीरें और ऑडियो – यानी डीपफेक (Deepfake) – अब दुनियाभर की सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। यह तकनीक जहां मनोरंजन में इस्तेमाल होती है, वहीं इसका दुरुपयोग कर लोगों की पहचान, प्रतिष्ठा और गोपनीयता पर हमला भी किया जा रहा है। इसी खतरे को रोकने के लिए डेनमार्क जैसे देश अब सख्त कानून की तैयारी में जुट गए हैं।
Deepfake तकनीक AI की मदद से किसी व्यक्ति की शक्ल या आवाज़ को बदलकर उसे दूसरे संदर्भ में पेश कर सकती है। जैसे किसी फिल्म में अभिनेता का चेहरा बदल देना, या किसी राजनेता से वह बातें कहलवाना जो उसने कभी नहीं कही।
2023 में अमेरिका में कलाकारों ने अपनी छवि की रक्षा के लिए AI विरोधी हड़ताल भी की थी।
डेनमार्क सरकार कॉपीराइट कानून में संशोधन कर रही है ताकि किसी व्यक्ति की शक्ल और आवाज़ को भी डिजिटल संपत्ति के रूप में कानूनी सुरक्षा मिल सके।
AI और Deepfake तकनीक के दौर में, यह कानून एक बड़ा कदम माना जा रहा है जो भविष्य में अन्य देशों के लिए भी मिसाल बन सकता है। भारत समेत बाकी देशों को भी जल्द ही इस दिशा में ठोस कार्रवाई की जरूरत है ताकि डिजिटल दुनिया में व्यक्ति की पहचान और गरिमा सुरक्षित रह सके।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।