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समाचारदेश Alert Star Digital Team Aug 5, 2025 04:14 PM

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, किसान आंदोलन की बुलंद आवाज अब खामोश हो गई

देश की राजनीति में अपने साफ़-सपाट और बेबाक अंदाज़ के लिए मशहूर रहे पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का 5 अगस्त 2025 को निधन हो गया। 79 वर्षीय सत्यपाल मलिक ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दोपहर 1:10 बजे अंतिम सांस ली।

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, किसान आंदोलन की बुलंद आवाज अब खामोश हो गई

देश की राजनीति में अपने साफ़-सपाट और बेबाक अंदाज़ के लिए मशहूर रहे पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का 5 अगस्त 2025 को निधन हो गया। 79 वर्षीय सत्यपाल मलिक ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दोपहर 1:10 बजे अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में उनका इलाज जारी था। उनके निजी सचिव केएस राणा ने यह जानकारी दी।

पूर्व राज्यपाल के एक्स (Twitter) अकाउंट से भी उनके निधन की पुष्टि की गई। सत्यपाल मलिक का जाना न केवल प्रशासनिक क्षेत्र के लिए बल्कि किसान आंदोलन और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों के लिए भी बड़ी क्षति है।

अनुच्छेद 370 हटते समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे मलिक

सत्यपाल मलिक का नाम 2019 में उस समय प्रमुखता से उभरा जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाया गया। उस वक्त वे राज्यपाल के पद पर थे। जब राज्य को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला, तब भी मलिक वहीं के उपराज्यपाल बनाए गए।

सत्यपाल मलिक का सियासी सफर

24 जुलाई 1946 को बागपत (उत्तर प्रदेश) में जन्मे सत्यपाल मलिक ने मेरठ यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक और एलएलबी की पढ़ाई की थी। 1968-69 में वे छात्र संघ के अध्यक्ष बने और यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई।

  • 1974 में पहली बार विधानसभा के सदस्य चुने गए
  • 1980-1989: उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य
  • 1989-1991: अलीगढ़ से जनता दल के सांसद
  • 1996: सपा से लोकसभा चुनाव लड़ा, हार गए
  • 2012: भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त हुए

वे भारतीय क्रांति दल, लोकदल, कांग्रेस, सपा, जनता दल और भाजपा जैसे कई दलों से जुड़े रहे।

राज्यपाल के रूप में सेवा

  • बिहार: सितंबर 2017 – अगस्त 2018
  • ओडिशा (प्रभारी): मार्च 2018 – अगस्त 2018
  • जम्मू-कश्मीर: अगस्त 2018 – अक्टूबर 2019
  • गोवा: नवंबर 2019 – अगस्त 2020
  • मेघालय: अगस्त 2020 – अक्टूबर 2022

बेबाक राय और किसानों के समर्थन से पहचान

किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मलिक ने जीवन के अंतिम वर्षों में किसानों, लोकतंत्र और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखी। उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान सरकार की नीतियों की आलोचना कर खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

देशभर से नेताओं ने जताया शोक

अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष):

“गोवा, बिहार, मेघालय और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे श्री सत्यपाल मलिक जी का निधन, अत्यंत दुःखद! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”

राकेश टिकैत (भाकियू नेता):

“ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक के निधन की दुखद सूचना प्राप्त हुई। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें।”

केसी त्यागी (जेडीयू नेता):

“यह मेरे लिए निजी क्षति है। हम दोनों ने चौधरी चरण सिंह की अगुवाई में राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक साथ की थी।”

प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस):

“देश के किसानों की मुखर आवाज एवं पूर्व राज्यपाल श्री सत्यपाल सिंह मलिक जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। मेरी गहरी संवेदनाएं।”

एमके स्टालिन (तमिलनाडु सीएम):

“वे सत्ता में रहते हुए भी सच बोलने का साहस रखते थे। इतिहास उन्हें उनके निर्णयों और विचारों के लिए याद रखेगा।”

आईपी सिंह (सपा):

“देश की एक बेखौफ आवाज आज शांत हो गई। भावभीनी श्रद्धांजलि। ओम शांति।”

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का जाना एक निर्भीक राजनेता, स्पष्टवक्ता और किसान समर्थक की विदाई है। उनके विचार और योगदान लंबे समय तक याद रखे जाएंगे।

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