होम World Peace के लिए साथ आए दलाई लामा और मैत्रेय दादाश्रीजी, ISCTH ने युद्ध रोकने को लेकर दुनिया से की बड़ी अपील
दुनिया में बढ़ते संघर्ष और युद्ध की आशंकाओं के बीच वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंटरनेशनल स्पिरिचुअल काउंसिल फॉर ट्रांसफॉर्मिंग ह्यूमैनिटी (ISCTH) ने विभिन्न देशों के प्रमुख धार्मिक नेताओं, नीति निर्माताओं और मानवतावादियों को एक साझा मंच पर जोड़ा है।
दुनिया में बढ़ते संघर्ष और युद्ध की आशंकाओं के बीच वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंटरनेशनल स्पिरिचुअल काउंसिल फॉर ट्रांसफॉर्मिंग ह्यूमैनिटी (ISCTH) ने विभिन्न देशों के प्रमुख धार्मिक नेताओं, नीति निर्माताओं और मानवतावादियों को एक साझा मंच पर जोड़ा है। इस पहल के तहत युद्ध रोकने और शांति स्थापित करने का संदेश दुनिया के सामने रखा गया।
ISCTH की इस पहल में वेटिकन के स्टेट सेक्रेटरी कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन, दलाई लामा, भारत से मैत्रेय दादाश्रीजी, UN-OCHA (UAE), FOREF Europe और स्विस संसद से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तियों के संदेश शामिल किए गए। सभी वक्ताओं ने विश्व में शांति, संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए मैत्रेय दादाश्रीजी ने कहा कि विभाजनकारी सोच और स्वार्थ से प्रेरित प्रयास पूरी मानवता और पृथ्वी के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'यदि युद्ध नहीं रुका, तो मानवता की पीड़ा सदियों तक गूंजती रहेगी और पृथ्वी ऐसी क्षति झेलेगी, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी.'
उन्होंने कहा कि मनुष्य पृथ्वी का मालिक नहीं बल्कि उसका संरक्षक है, इसलिए इसकी रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत आबादी यूरोप और एशिया में निवास करती है, इसलिए इन दोनों महाद्वीपों पर मानवता के भविष्य को सुरक्षित रखने की विशेष जिम्मेदारी है।
मैत्रेय दादाश्रीजी ने अपने संदेश में रूस और यूक्रेन से युद्ध के बजाय बातचीत और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की। उनका कहना था कि स्थायी शांति केवल आपसी समझ और समाधान से ही संभव है, जिससे पूरी दुनिया सुरक्षित और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सके।
अपने संदेश का समापन उन्होंने इन शब्दों के साथ किया, 'एक परमात्मा के लिए-आइए, हम एक हों. एक पृथ्वी के लिए-आइए, हम एक हों.'
दलाई लामा ने अपने संदेश में कहा कि शांति की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति के भीतर से होती है और स्थायी शांति कभी भी बल प्रयोग से नहीं, बल्कि करुणा और मानवीय मूल्यों से प्राप्त होती है।
वहीं, कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया को हथियारों की बढ़ती होड़ के खिलाफ और शांति के समर्थन में पहले से अधिक मजबूत और प्रभावी आवाज़ों की आवश्यकता है।
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