होम बिहार में शिक्षा और न्याय व्यवस्था को बड़ा बूस्ट! 5 नए प्राइवेट यूनिवर्सिटी और 4 शहरों में कोर्ट भवनों को मिली मंजूरी
बिहार में उच्च शिक्षा और न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सम्राट सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट की बैठक में पांच नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन को मंजूरी दे दी गई है।
बिहार में उच्च शिक्षा और न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सम्राट सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट की बैठक में पांच नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही चार जिलों में नए न्यायालय भवनों के निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान की गई है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 45 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।
राज्य सरकार की मंजूरी के बाद बिहार के विभिन्न जिलों में पांच निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों के शुरू होने से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
मधुबनी में शांजा विश्वविद्यालय की स्थापना और संचालन को स्वीकृति दी गई है। वहीं सीवान में एक नए निजी विश्वविद्यालय को मंजूरी मिली है। नवादा जिले के अशोक नगर में एसए विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। राजधानी पटना में हिमालय विश्वविद्यालय को स्वीकृति प्रदान की गई है, जबकि औरंगाबाद के जसोइया मोड़ में सीतयोग विश्वविद्यालय की स्थापना एवं संचालन को हरी झंडी दे दी गई है।
कैबिनेट ने न्यायिक ढांचे को सशक्त बनाने के लिए चार जिलों में नए न्यायालय परिसरों के निर्माण को भी मंजूरी दी है। इसके तहत महाराजगंज (सीवान) में 10 कोर्ट भवन, एमेनिटी भवन और हाजत भवन के निर्माण के लिए 34.33 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में 20 कोर्ट भवनों के निर्माण के लिए 53.02 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। बेगूसराय में जी+7 संरचना वाले 15 कोर्ट भवनों के निर्माण पर 39.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं नवादा जिले के रजौली में 10 कोर्ट भवन, एमेनिटी भवन और हाजत भवन निर्माण के लिए 38.38 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से न्यायिक व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। न्यायालयों में बढ़ते कार्यभार को संभालने में मदद मिलेगी और लोगों को बेहतर न्यायिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। साथ ही मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
कैबिनेट बैठक में शहरी विकास से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। अमृत 2.0 योजना के तहत छपरा सीवरेज नेटवर्क परियोजना के लिए 76.48 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।
इस परियोजना के लागू होने के बाद छपरा शहर में सीवरेज प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। इससे स्वच्छता में सुधार होगा और नागरिकों को आधुनिक शहरी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में कुल 45 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शिक्षा, न्यायिक आधारभूत संरचना और शहरी विकास से जुड़े फैसलों को राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से विभिन्न जिलों में शिक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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