होम तीन तलाक और हलाला मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, बोला- धार्मिक प्रथाओं की आड़ में अपराध स्वीकार नहीं

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेशविचारकानून Alert Star Digital Team Jul 3, 2026 09:06 PM

तीन तलाक और हलाला मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, बोला- धार्मिक प्रथाओं की आड़ में अपराध स्वीकार नहीं

हलाला के नाम पर नाबालिग से कथित यौन शोषण और बाद में गैंगरेप के आरोपों से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और उनकी विस्तृत आपराधिक जांच आवश्यक है।

तीन तलाक और हलाला मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, बोला- धार्मिक प्रथाओं की आड़ में अपराध स्वीकार नहीं

हलाला के नाम पर नाबालिग से कथित यौन शोषण और बाद में गैंगरेप के आरोपों से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और उनकी विस्तृत आपराधिक जांच आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक प्रथा या व्यक्तिगत कानून की आड़ लेकर आपराधिक कृत्यों को सही नहीं ठहराया जा सकता।

FIR रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने CRLP(A) 8465/2026 समेत इससे जुड़ी चार आपराधिक रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। अदालत ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि मामले की प्रारंभिक अवस्था में एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने पहले दी गई सभी अंतरिम राहतें भी समाप्त कर दीं।

नाबालिग की सहमति को कानून नहीं देता मान्यता

एफआईआर के अनुसार, पीड़िता की पहली शादी वर्ष 2015 में हुई थी, जब वह नाबालिग थी। आरोप है कि तलाक के बाद उसे निकाह हलाला के नाम पर जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद भी हलाला की आड़ में उसके साथ गैंगरेप जैसे गंभीर अपराध किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की किसी भी लड़की की सहमति कानूनन मान्य नहीं होती। यदि किसी नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाए जाते हैं, तो वह सीधे तौर पर अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में POCSO Act के प्रावधान लागू होंगे।

'परंपरा के नाम पर अपराध को नहीं दी जा सकती मान्यता'

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि धार्मिक परंपराओं या व्यक्तिगत कानूनों का हवाला देकर किसी भी आपराधिक कृत्य को वैध नहीं ठहराया जा सकता। यदि किसी परंपरा की आड़ में अपराध किया गया है, तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में निहित समानता, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मूल्यों के विपरीत है। अदालत ने इन आरोपों को "अंतरात्मा को झकझोरने वाले" बताते हुए माना कि पहली कथित हलाला प्रक्रिया के दौरान पीड़िता नाबालिग थी, जबकि दूसरी बार हलाला के नाम पर उसके साथ गैंगरेप की कथित साजिश रची गई।

क्या है पूरा मामला?

मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सैदनगली थाना क्षेत्र का है। आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2015 में पीड़िता का निकाह महज 15 वर्ष की उम्र में जबरन कराया गया था। वर्ष 2016 में उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया। इसके बाद दोबारा शादी का झांसा देकर नवंबर 2016 में कथित रूप से उसे जबरन निकाह हलाला के लिए मजबूर किया गया। वर्ष 2017 में उसका दोबारा निकाह कराया गया।

एफआईआर के अनुसार, वर्ष 2021 में पति ने दूसरी शादी करने के बाद पीड़िता को फिर से तलाक दे दिया। बाद में दूसरी पत्नी से संतान न होने पर उसने पीड़िता से तीसरी बार शादी करने का कथित झांसा दिया। आरोप है कि 19 फरवरी 2025 को हलाला के नाम पर अपने दो भाइयों के जरिए पीड़िता के साथ गैंगरेप कराया गया। इस मामले में कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

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