होम फिर साथ आएंगे चाचा-भतीजा? चाहकर भी नहीं बन पा रही बात, जानें कहां फंस रहा पेंच

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Dec 6, 2021 09:05 PM

फिर साथ आएंगे चाचा-भतीजा? चाहकर भी नहीं बन पा रही बात, जानें कहां फंस रहा पेंच

फिर साथ आएंगे चाचा-भतीजा? चाहकर भी नहीं बन पा रही बात, जानें कहां फंस रहा पेंच

फिर साथ आएंगे चाचा-भतीजा? चाहकर भी नहीं बन पा रही बात, जानें कहां फंस रहा पेंच

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। इस चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल लगातार जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में अखिलेश यादव झांसी में थे जहां उन्होंने बातों ही बातों में चाचा शिवपाल यादव का जिक्र कर दिया। दरअसल, शिवपाल यादव का जिक्र करते हुए अखिलेश ने योगी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि चाचा के कराएं काम का सीएम ने पीएम से उद्घाटन करा दिया। भले ही अखिलेश ने यह बयान भाजपा पर हमला करने के लिए दिया हो लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इस बयान के कई मायने निकालने लगे। सबसे बड़ा सवाल तो यही होने लगा कि क्या अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव की पार्टी के बीच गठबंधन का फार्मूला तय हो गया है? क्या समाजवादी पार्टी का दरवाजा शिवपाल यादव के लिए खोल दिया गया है? आपको बता दें कि 2016-17 में मुलायम सिंह के परिवार में हुई हलचल के पास अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव की दूरियां सार्वजनिक हो गई थी। 

माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और शिवपाल सिंह यादव की पार्टी के बीच गठबंधन की कवायद कम से कम 2 सालों से चल रही है। हालांकि, किसी न किसी बात को लेकर पेंच फंस ही जाता हैं। कभी शिवपाल समाजवादी पार्टी से 100 सीटों की मांग कर देते हैं तो कभी अपने साथ समाजवादी पार्टी को छोड़कर जाने वाले लोगों को भी एक बार फिर से पार्टी में शामिल करने की मांग कर देते हैं। दूसरी ओर अखिलेश यादव लगातार वेट एंड वॉच की पॉलिसी में हैं। अखिलेश चाहते हैं कि जैसे-जैसे समय बीतेगा, चाचा की मांग थोड़ी कम होती जाएगी। हालांकि अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि वह छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन करेंगे। इसके अलावा चाचा शिवपाल पर लेकर भी अखिलेश यादव बार-बार कहते रहे हैं कि वह जिस सीट पर लड़ेंगे, उस सीट पर सपा अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इसके अलावा अखिलेश ने यह भी कहा है कि जिस सीट पर शिवपाल यादव की पार्टी मजबूत होगी वहां पर हम उम्मीदवार नहीं उतारने पर विचार कर सकते हैं। 

 

हालांकि, शिवपाल यादव कई बार समाजवादी पार्टी में अपनी पार्टी का विलय कराने बात भी छेड़ देते हैं। यही कारण है कि शिवपाल सिंह यादव बार-बार अखिलेश यादव को अल्टीमेटम दे रहे हैं। गठबंधन को लेकर पहले उन्होंने 11 अक्टूबर तक समाजवादी पार्टी को फैसला लेने का अल्टीमेटम दिया था। बाद में उन्होंने मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर एक बार फिर से समाजवादी पार्टी को फैसला लेने के लिए कहा। इसके साथ ही अखिलेश पर दबाव बनाने के लिए शिवपाल यह भी कह चुके हैं कि अगर बात नहीं बनी तो वह लखनऊ में बड़ी रैली कर अपना राह चुन लेंगे। हालांकि यह बात भी सच है कि अखिलेश यादव शिवपाल यादव के अल्टीमेटम को कुछ ज्यादा भाव नहीं दे रहे हैं और कई अल्टीमेटम बीत जाने के बाद भी शिवपाल यादव अब भी खामोश हैं। 

 

क्यों नहीं बन रही बात

उत्तर प्रदेश की राजनीति को जानने वाले यह दावा करते हैं कि अखिलेश और शिवपाल का एक साथ आना इतना आसान भी नहीं है। जिस तरीके से 2017 में परिवार में घमासान हुआ था, उसके बाद आपसी रिश्तो में भी काफी कड़वाहट आ गई है। एक दूसरे पर निजी हमले किए गए थे जिसके घाव अब तक नहीं भरे हैं। इसके अलावा अखिलेश यादव चाचा के आगामी कदमों का भी इंतजार करना चाहते हैं। अखिलेश यादव को लगता है कि गठबंधन की कवायद जितनी लंबी जाएगी, शिवपाल के सामने विकल्प उतने ही सीमित होते जाएंगे। फिलहाल शिवपाल की 100 सीटों वाली मांग और एसपी छोड़ कर गए लोगों को भी पार्टी में लिए जाने वाली मांगो को अखिलेश किसी भी कीमत पर नहीं मानना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि अगर वह ऐसा करते हैं तो पार्टी में ही एक नया विपक्ष तैयार हो सकता है। 

 

चाचा बना चाचा

शिवपाल और अखिलेश के मिलन में दूसरे चाचा रामगोपाल यादव काफी बड़ा रोल रहने वाला है। रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव के बीच की खटास सबको पता है। अमर सिंह को लेकर दोनों के रिश्ते में किस तरह की कड़वाहट आई थी। शिवपाल के करीबी रहे अमर सिंह ने मुलायम से कहकर रामगोपाल यादव को पार्टी से निकलवा दिया था। इसके बाद रामगोपाल ने अखिलेश की ताजपोशी कर अमर सिंह को और फिर शिवपाल सिंह यादव को पार्टी में ही कमजोर कर दिया। इसके अलावा शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव के बीच कड़वाहट उस समय और भी तेज हो गई जब 2019 के लोकसभा चुनाव में शिवपाल यादव फिरोजाबाद से रामगोपाल यादव के सांसद बेटे अक्षय के खिलाफ लड़ें। दोनों की हार हुई। 

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