होम इस बार दिवाली पर माता लक्ष्मी की किस रूप में होगी पूजा, क्या है नील कमल और शंख से कनेक्शन?

समाचारदेश Alert Star Digital Team Oct 28, 2024 09:59 PM

इस बार दिवाली पर माता लक्ष्मी की किस रूप में होगी पूजा, क्या है नील कमल और शंख से कनेक्शन?

इस बार दिवाली पर माता लक्ष्मी की किस रूप में होगी पूजा, क्या है नील कमल और शंख से कनेक्शन?

इस बार दिवाली पर माता लक्ष्मी की किस रूप में होगी पूजा, क्या है नील कमल और शंख से कनेक्शन?

दिवाली पर माता लक्ष्मी की पूजा होगी. मान्यता है कि इस पूजा से जातकों के घर में माता लक्ष्मी अपना आवास बनाती है. इससे जानक के घर में धन धान्य बढ़ता है. शास्त्रों में माता लक्ष्मी के 8 स्वरुप आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, भाग्य लक्ष्मी , विजयलक्ष्मी और विद्यालक्ष्मी बताए गए हैं.

ऐसे में सवाल यह है कि इस बार की दिवाली में माता के किस स्वरुप की पूजा होगी और इस पूजा का विधान क्या होगा? इस प्रसंग में हम आपको यही बताने जा रहे हैं. शास्त्रीय परंपरा के मुताबिक इस दिवाली माता लक्ष्मी के भाग्य लक्ष्मी स्वरुप की पूजा होगी.

इस स्वरुप का एक नाम नील पद्मजा भी है. इस स्वरूप में चतुर्भुजी माता नील कमल पर विराजमान होंगी. उनके एक हाथ में शंख होगा तो दूसरे में अमृत से भरा कलश होगा. इसी प्रकार तीसरा हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में होगा. वहीं चौथे हाथ से माता अपने साधकों पर धन वर्षा करेंगी. अब समझ लीजिए माता के नील कमल पर विराजमान होने का अर्थ. दरअसल नील कमल पवित्रता, सुंदरता का परिचायक है और यह अपनी चमकदार पंखुड़ियां फैलाकर माता के लिए दिव्य आसन प्रदान करता है. शास्त्रों के मुताबिक माता लक्ष्मी खुद समुद्र से प्रकट हुई है और कमल भी जल में पैदा होता है.

नील कमल से आध्यात्मिक समृद्धि का संदेश

ऐसे में कमल को माता लक्ष्मी के मायके का साथी कहा गया है. इसी प्रकार जल से ही निकले शंख को माता लक्ष्मी का भाई माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक कमल के साथ माता लक्ष्मी का यह जुड़ाव केवल प्रतीक भर नहीं है.बल्कि भक्तों के जीवन में व्यवहारिक और आध्यात्मिक समृद्धि के साथ ही सुख संपदा को भरने वाला है. नील कमल का महत्व इससे भी समझा जा सकता है कि यह भगवान नारायण के हाथ में भी नजर आता है. श्रीमदभागवत महापुराण के मुताबिक भगवान नारायण के हाथ में मौजूद कमलनाल से ही ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई. जिन्होंने सृष्टि की रचना की.

नील कमल और शंख से होगी पूजा

नील कमल से माता लक्ष्मी के जुड़ाव की वजह से ही उन्हें पद्मा या पद्मजा के नाम से भी जाना जाता है. विद्वानों के मुताबिक इस दिवाली माता लक्ष्मी का तेज उनके आठ स्वरुपों में से एक भाग्य लक्ष्मी यानी नील पद्मजा के रूप में प्रचंड हो रहा है. इसलिए माता की पूजा भी उनके गुण धर्म के हिसाब से होगी. इस स्वरूप में शंख से अभिषेक करने पर प्रसन्न होती है. इसके अलावा आसन में उन्हें नीलकमल ही पसंद है. मान्यता है कि ऐसा करने वाले जातकों पर माता लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है.

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