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समाचारदेश Alert Star Digital Team Oct 28, 2024 09:23 PM

जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए जान भी कुर्बान. चुनाव के बाद वापस जेल गए इंजीनियर राशिद

जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए जान भी कुर्बान. चुनाव के बाद वापस जेल गए इंजीनियर राशिद

जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए जान भी कुर्बान. चुनाव के बाद वापस जेल गए इंजीनियर राशिद

जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सांसद शेख अब्दुल राशिद ने अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने के बाद सोमवार को दिल्ली में तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया है। इंजीनियर राशिद को टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

NIA ने 2017 में राशिद को UAPA के तहत गिरफ्तार किया था जिसके बाद से वह 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। अतिरिक्त सेशंस कोर्ट ने जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार करने के लिए इंजीनियर राशिद को 10 सितंबर को अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद कोर्ट ने रशीद के पिता के स्वास्थ्य को देखते हुए उनकी अंतरिम जमानत 28 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। एनआईए ने कहा था कि उसने दस्तावेजों का सत्यापन कर लिया है और वह आरोपी के पिता की स्वास्थ्य की स्थिति की वजह से जमानत याचिका का विरोध नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने इससे पहले उनकी नियमित जमानत याचिका पर आदेश स्थगित कर दिया था।

जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए जान कुर्बान- इंजीनियर राशिद

आवामी इत्तेहाद पार्टी के अध्यक्ष और सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ ​​इंजीनियर राशिद ने सोमवार को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करने से पहले कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हैं। मीडिया से बात करते हुए इंजीनियर राशिद ने कहा, "हम जनता के लिए अपनी जान कुर्बान करने के लिए तैयार हैं। हमने कुछ भी गलत नहीं किया है। हमें न्याय मिलेगा। चाहे हम जेल में हों या अपने घर में हम हमेशा लोगों की भलाई, कश्मीर के भलाई और शांति की बात करेंगे, लेकिन सम्मान और गरिमा के साथ। हम आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों से कहूंगा कि सच्चाई हमारे साथ है हम गलत नहीं हैं। हम चाहते हैं कि कश्मीर में शांति और विकास हो। लेकिन हम अपने अधिकार भी वापस चाहते हैं।"

फारूक अब्दुल्ला पर लगाया आरोप

इंजीनियर राशिद ने फारूक अब्दुल्ला पर पाकिस्तान पर अपना रुख बदलने का आरोप लगाया और कहा कि अब्दुल्ला सत्ता में होने पर एक राय रखते हैं और सत्ता से बाहर होने पर दूसरी। उन्होंने कहा, "जब वे सत्ता में होते हैं तो एक राय रखते हैं लेकिन जब सत्ता से बाहर होते हैं तो अलग राय रखते हैं। उमर अब्दुल्ला भी इसी तरह का पैटर्न अपनाते हैं। 1947 से ही उनकी पार्टी ने दोहरा मापदंड अपनाया है। हालांकि, समय आएगा जब लोग उन्हें सबक सिखाएंगे। उन्होंने अनुच्छेद 370 का इस्तेमाल कर वोट हासिल किए लेकिन अब वे इसका जिक्र भी नहीं कर रहे हैं।"

आतंकी हमले की निंदा

इंजीनियर राशिद ने आगे कहा कि सीएम उमर अब्दुल्ला जो भी अच्छे फैसले लेंगे उनमें वह उन का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि सीएम उमर अब्दुल्ला अपने सभी वादे पूरे करेंगे, जहां भी वह अच्छा करेंगे, मैं उनका समर्थन करूंगा और जहां भी वह कश्मीरियों के पक्ष में काम नहीं करेंगे, हम लोकतांत्रिक तरीके से पूरी ताकत से काम करेंगे।" इंजीनियर राशिद ने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा, "हम किसी भी हिंसा के खिलाफ हैं। सुलह की जरूरत है। सभी हितधारकों को एक साथ आकर बात करनी चाहिए। शांति बहाल करने के लिए हमें 1947 से चले आ रहे सिद्धांतों को नहीं भूलना चाहिए। न्याय के बिना शांति हासिल नहीं की जा सकती और न्याय तभी हो सकता है जब सभी हितधारक समाधान पर चर्चा करने के लिए एक साथ आएं।"

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