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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Sep 11, 2024 08:46 PM

ज्ञानवापी मस्जिद के गुंबद के नीचे शिवलिंग है. हिंदू पक्ष ने कोर्ट से की एएसआई सर्वे की मांग

ज्ञानवापी मस्जिद के गुंबद के नीचे शिवलिंग है. हिंदू पक्ष ने कोर्ट से की एएसआई सर्वे की मांग

ज्ञानवापी मस्जिद के गुंबद के नीचे शिवलिंग है. हिंदू पक्ष ने कोर्ट से की एएसआई सर्वे की मांग

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष ने बुधवार को एक अदालत से अनुरोध किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एक टीम को परिसर में सर्वे करने के लिए खुदाई करने की अनुमति दी जाए.

मामले की जानकारी देते हए एक वकील ने बताया कि जज ने ज्ञानवापी परिसर के बचे हिस्सों की एएसआई सर्वेक्षण के अनुरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई की. इसके साथ ही कोर्ट ने अगली तारीख की सुनवाई के लिए 18 सितंबर तय की है.

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि भी अदालत में मौजूद थे. मामले की अगली सुनवाई के दौरान ये पक्ष भी अपनी राय रख सकता है. हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि सीनियर डिवीजन तुरंत अदालत के सिविल जज जुगल शंभू ने हिंदू पक्ष को सुनने के बाद दूसरी तारीख तय की है.

हिंदू पक्ष की दलील पूरी

वकील मदन मोहन यादव ने बताया कि हिंदू पक्ष ने केस में अपनी दलील पूरी कर ली है. एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) को सर्वे के लिए परिसर में खुदाई करने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष ने तर्क दिया है कि ज्योतिर्लिंग का मूल स्थान ज्ञानवापी परिसर के कथित मस्जिद के गुंबद के बिल्कुल नीचे बीच में है.

पुरातत्व विभाग से कराई जाए जांच

उन्होंने बताया कि शिवलिंग के अरघे से जो जल लगातार प्रवाहित होता रहता था, वो ज्ञानवापी कुंड में एकत्रित हो जाता था. ऐसा माना जाता था कि इस पानी को पीने से ज्ञान का लाभ मिलता है. उन्होंने कहा कि इसलिए ही इस तीर्थ को ‘ज्ञानोदय तीर्थ’ भी माना जाता है. पिछली सुनवाई में हिंदू पक्ष के वकील मांग कर चुके हैं कि इस पानी की खोज जल इंजीनियरिंग, भूवैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों से कराई जाए.

यादव ने आगे बताया कि इसके अलावा ज्ञानोदय तीर्थ से मिले ‘शिवलिंग’, जिसे मुस्लिम पक्ष ‘वुजुखाना’ बता रहा है, उसकी भी जांच होनी चाहिए, जिससे ये पता चले कि ये ‘शिवलिंग’ है या फव्वारा.

कब से शुरू हुआ ज्ञानवापी केस

ज्ञानवापी का मामला आज का नहीं है, बल्कि इस मामले की पहली याचिका 1991 में वाराणसी कोर्ट में दाखिल की गई थी. इस याचिका में पूजा करने की अनुमति मांगी गई थी. हालांकि 1993 में ज्ञानवापी के मुकदमे में स्टे लगा दिया गया. 1998 में केस की फिर से सुनवाई शुरू हुई. लेकिन मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में एक तर्क दिया कि मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में नहीं हो सकती, जिसके बाद मामले में फिर सुनवाई बंद हो गई. इस मामले में कई याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी. लेकिन 23 मई को 2023 को वाराणसी जिला जज की ओर से एक अहम फैसला लिया गया और कहा गया कि ज्ञानवापी मामले में सभी सातों केस एक साथ सुने जाएंगे.

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