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प्रादेशिकीबिहार Alert Star Digital Team Jun 27, 2026 08:29 PM

Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बढ़ा इंसाफ का दबाव, महापंचायत ने सरकार को 30 जून तक दिया समय

बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले को लेकर न्याय की मांग लगातार तेज होती जा रही है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में आयोजित महापंचायत के बाद सरकार और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बढ़ा इंसाफ का दबाव, महापंचायत ने सरकार को 30 जून तक दिया समय

बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले को लेकर न्याय की मांग लगातार तेज होती जा रही है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में आयोजित महापंचायत के बाद सरकार और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। महापंचायत के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने कहा है कि 30 जून तक सरकार की कार्रवाई का इंतजार किया जाएगा। यदि तब तक एफआईआर में नामजद पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।

महापंचायत ने सरकार को 30 जून तक का दिया समय

महापंचायत के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने बताया कि 24 जून को हुई महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि भरत तिवारी के श्राद्ध तक सरकार को कार्रवाई का अवसर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, "24 जून को आयोजित महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि भरत तिवारी के श्राद्ध तक सरकार को कार्रवाई का अवसर दिया जाएगा. सामान्य मामलों में हत्या की एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है, लेकिन इस मामले में अब तक किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. इससे लोगों का पुलिस पर भरोसा कमजोर हो रहा है और प्रशासन का रवैया ढुलमुल दिखाई दे रहा है."

पुलिस पर लगाए जांच को प्रभावित करने के आरोप

पंकज त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि पुलिस पूरे मामले को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि घटना के सात दिन बाद पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन इसके बाद भी ऐसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हो सके।

'अमर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष समिति' का गठन

महापंचायत में आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय करते हुए 'अमर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष समिति' का गठन किया गया। समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा बनाए गए हैं, जबकि अधिवक्ता नागेश्वर दुबे को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

पंकज त्रिपाठी को समिति का संयोजक और भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी को सह-संयोजक बनाया गया है। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग समितियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

SDM की भूमिका पर भी उठे सवाल

महापंचायत के संयोजक ने एसडीएम की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार लगातार एसडीएम को पूरे घटनाक्रम का कथित साजिशकर्ता बता रहा है। उनके अनुसार, जवनिया बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और फंड से जुड़े विवाद से ही पूरे मामले की शुरुआत हुई थी।

उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह आशंका भी जताई कि जब्त किए गए मोबाइल फोन के डेटा के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज

पंकज त्रिपाठी ने कहा, "समिति अब 30 जून तक सरकार की कार्रवाई पर नजर रखेगी. अगर इस अवधि में एफआईआर में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी होती है तो आगे की रणनीति उसी के आधार पर तय की जाएगी. लेकिन यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा."

उन्होंने एक भावनात्मक सवाल उठाते हुए कहा, "क्या बिलौटी में पैदा होना गुनाह है? क्या ब्राह्मण समाज में पैदा होना गुनाह है?"

उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के ही बिहार पुलिस के सिपाही आशीष तिवारी को एक वायरल वीडियो के आधार पर बर्खास्त कर दिया गया, जिससे समाज में प्रशासन के दमनात्मक रवैये का संदेश जा रहा है।

पंकज त्रिपाठी ने कहा कि यदि सरकार निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करती और दोषियों को बचाने की कोशिश जारी रहती है तो लोगों का व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। फिलहाल महापंचायत और संघर्ष समिति 30 जून तक सरकार की कार्रवाई का इंतजार करेगी, जिसके बाद आगे के आंदोलन पर फैसला लिया जाएगा।

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