होम Iran-US War: ट्रंप के आरोपों के बीच अमेरिका का ईरान पर बड़ा सैन्य हमला, होर्मुज स्ट्रेट फिर बना टकराव का केंद्र
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच टकराव और तेज हो गया है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच टकराव और तेज हो गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीज़फायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। वहीं, ईरान ने भी अमेरिकी कार्रवाई को समझौते का उल्लंघन बताते हुए जवाबी कार्रवाई का दावा किया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, शुक्रवार को ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों के साथ-साथ तटीय रडार पोजिशन पर सैन्य कार्रवाई की गई। अमेरिका का कहना है कि यह हमला एक दिन पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन अटैक के जवाब में किया गया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कार्गो जहाज पर हुए हमले के कारण क्षेत्र में फंसे नाविकों को सुरक्षित निकालने का अभियान भी प्रभावित हुआ। दूसरी ओर, ईरान ने जहाज पर हमले का बचाव करते हुए कहा कि संबंधित जहाज ने खाड़ी के जलमार्ग से गुजरने के लिए बिना अनुमति वाले मार्ग का इस्तेमाल किया था।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार (27 जून 2026) को जारी बयान में अमेरिका पर अंतरिम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और पूरे संकट के लिए वॉशिंगटन को जिम्मेदार ठहराया।
वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी नौसेना ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, हालांकि इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। CENTCOM ने भी अपने बयान में कहा कि ईरान द्वारा कमर्शियल शिपिंग पर हमला सीज़फायर का स्पष्ट उल्लंघन है और इससे समुद्री व्यापार तथा नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है। अमेरिका ने यह भी दोहराया कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी सहायता जारी रखेगा।
तनाव के बीच बहरीन ने दावा किया कि शनिवार सुबह कई ईरानी ड्रोन उसके क्षेत्र में पहुंचे। बहरीन ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए ईरान पर क्षेत्र में शांति प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
उधर, यूनाइटेड किंगडम मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशन (UKMTO) ने जानकारी दी कि होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, लेकिन सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं और किसी प्रकार के पर्यावरणीय नुकसान की सूचना नहीं है।
17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच 14-पॉइंट समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत ईरान ने 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने का वादा किया था।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान को समझौते के किसी पहलू पर आपत्ति है तो बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन हिंसक कार्रवाई का जवाब भी उसी तरह दिया जाएगा।
वहीं, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बातचीत जारी रहने के बावजूद हमला किया है। उन्होंने इसे सीज़फायर का गंभीर उल्लंघन बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान की हालिया कार्रवाई पसंद नहीं आई और ईरान को ऐसा नहीं करना चाहिए था।
हाल के दिनों में अमेरिका का दावा था कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने का प्रस्ताव भी छोड़ दिया गया है। हालांकि, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने स्पष्ट किया कि अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संचालन पहले जैसा नहीं रहेगा।
गुरुवार को सिंगापुर के कार्गो जहाज 'इवर लावली' पर ओमान के दाहित पोर्ट के पास हमला हुआ था। जहाज संचालक कंपनी के अनुसार, पोत निर्धारित मार्ग पर ही चल रहा था और सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं।
इस घटना के बाद इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने मुख्य शिपिंग लेन में फंसे 11,000 से अधिक नाविकों को निकालने की योजना फिलहाल रोक दी है। लगातार बढ़ते तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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