होम मुश्किल परीक्षा में बैठ रहे हैं अमित शाह, किसान आंदोलन के अलावा यूपी चुनाव और 2024 भी देखना है
मुश्किल परीक्षा में बैठ रहे हैं अमित शाह, किसान आंदोलन के अलावा यूपी चुनाव और 2024 भी देखना है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में जो अहम बदलाव किए हैं, उसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका बढ़ गई है। नए सहकारिता मंत्रालय की कमान शाह को सौंप दी गई है। जानकारों का कहना है कि अमित शाह अपने जीवन की सबसे मुश्किल परीक्षा में बैठ रहे हैं। उनके सामने किसान आंदोलन को साधना है। किसी भी तरह से किसानों को समझाकर आंदोलन खत्म कराना है। इसके बाद 2022 में यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और गुजरात जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हैं। उनकी जिम्मेदारी यहीं पर खत्म नहीं हो जाती। जिस तरह से पीएम मोदी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक अतिरिक्त राज्य मंत्री दिया है, उससे यह बात साफ हो जाती है कि अमित शाह अब दूसरी कई जिम्मेदारियों को निभाने जा रहे हैं। गृह मंत्रालय में अब उनके पास तीन सहयोगी मंत्री हो गए हैं। संभव है कि वे राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होकर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को मजबूत करेंगे।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, जब अमित शाह पार्टी की कमान संभाले हुए थे, तो पार्टी का ग्राफ तेजी से बढ़ा था। कई राज्यों में पार्टी की सरकार बनी थी। 2019 में जब भाजपा को दोबारा सत्ता मिली तो अमित शाह को केंद्रीय गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जैसा बड़ा कदम उठाया। इसके अलावा एनआईए कानून में संशोधन कर जांच एजेंसी को अधिक शक्तियां दे दी गई। सीएए और एनआरसी को लेकर उन्हें विपक्ष और सिविल सोसायटी के लोगों की आलोचना झेलनी पड़ी।
कोरोनाकाल के दौरान शाह ने दिल्ली में दो बार मोर्चा संभाला। शाह के सामने बड़ी चुनौती किसान आंदोलन रहा है। उन्होंने खुद किसानों से बात की है, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हो सका। अब धीरे धीरे यह आंदोलन भाजपा और केंद्र सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है। किसान संगठनों के नेताओं ने घोषणा कर दी है कि यूपी चुनाव में भाजपा को हराने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे। हरियाणा, पंजाब और यूपी के कुछ इलाकों में भाजपा नेताओं को काले झंडे दिखाए जा रहे हैं। मंत्रियों को उद्घाटन समारोह तक टालने पड़ रहे हैं। अगले साल यूपी सहित कई राज्यों में चुनाव है। अगर दो तीन माह में किसान आंदोलन को खत्म नहीं कराया तो भाजपा को बड़ी मुसीबतें झेलनी पड़नी सकती हैं।
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