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समाचारअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Jun 3, 2021 08:04 PM

कांग्रेस विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी देने का आरोप, मच गया सियासी बवाल

कांग्रेस विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी देने का आरोप, मच गया सियासी बवाल

कांग्रेस विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी देने का आरोप, मच गया सियासी बवाल

चंडीगढ़: जहां एक ओर पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी सरकार और पार्टी में जारी अंतर्कलह और तनाव को खत्म करने के लिए दिल्ली के दौरे पर हैं, तो वहीं पंजाब में एक और नया विवाद उनके पीछे लग गया है। कैप्टन पर विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि वो कुछ ऐसे सीनियर कांग्रेसी विधायक जिन्हें कैबिनेट में जगह नहीं दी जा सकी, उनके बेटों और रिश्तेदारों को सरकारी नौकरी देकर खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। अकाली दल और आम आदमी पार्टी का कहना है कि इस तरह से मोटी सरकारी नौकरियां बांटकर कैप्टन अमरिंदर सिंह नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अपने नाराज चल रहे विधायकों को खुश करना चाहते हैं।

पार्टी में जारी घमासान के बीच कुछ विधायकों की नाराजगी को दूर करने के लिए कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार ने ये नया रास्‍ता अपनाया है। कुछ विधायकों की नाराजगी को दूर करने के लिए उनके बेटों को डीएसपी, तहसीलदार जैसे पदों से नवाजा जा रहा है। विभागीय सचिवों के ऐतराज के बाद अब बीच का रास्ता निकाला जा रहा है और कैबिनेट की मंजूरी के लिए इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, विधायक फतेहजंग बाजवा के बेटे अर्जुन प्रताप सिंह बाजवा को डीएसपी और राकेश पांडे के बेटे भीष्म पांडे को तहसीलदार लगाने के एजेंडे को जल्द ही कैबिनेट में लाकर मंजूरी ली जाएगी। विधायक फतेहजंग बाजवा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के धुर-विरोधी राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के छोटे भाई हैं। खुद फतेह भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले रखते है लेकिन आजकल शांत हैं।

राकेश पांडे सबसे सीनियर विधायक होने के बावजूद कैबिनेट में जगह नहीं पा सके। दोनों विधायकों फतेहजंग बाजवा और राकेश पांडे के पिता आतंकी हमलों में मारे गए थे। अब अनुकंपा के आधार पर दिवंगत नेताओं के पोतों को डीएसपी व तहसीलदार के पद दिए जा रहे हैं। फतेहजंग बाजवा के पिता सतनाम सिंह बाजवा को 1987 में अमृतसर में और राकेश पांडे के पिता जोगिंदर पाल पांडे भी 1987 में ही लुधियाना में एक पेट्रोल पंप के पास आतंकी हमले का शिकार हो गए थे।

इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता बेअंत सिंह के पोते गुरकीरत कोटली के बेटे को भी तहसीलदार की नौकरी देने का प्रावधान रखा जा रहा है। बेअंत सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री रहते हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। जबकि गुरकीरत कोटली व सांसद रवनीत बिट्टू के भाई को पहले ही इसी आधार पर पंजाब पुलिस में डीएसपी नियुक्त किया जा चुका है। दरअसल गुरकीरत कोटली बेअंत सिंह के परिवार से आते हैं और लगातार दो बार जीतते आ रहे विधायक हैं लेकिन उसके बावजूद उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं दी गई। इसी बात से वो नाराज हैं।

राकेश पांडे भी लुधियाना से लगातार जीतते आ रहे हैं लेकिन पार्टी का बड़ा हिंदू चेहरा होने के बावजूद कैबिनेट में जगह नहीं पा सके। फतेहजंग बाजवा भी प्रताप सिंह बाजवा के भाई होने के बावजूद और लगातार जीतने के बावजूद कैबिनेट में जगह नहीं पा सके।

हालांकि इस पूरे मामले पर फतेहजंग सिंह बाजवा ने कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। जबकि विधायक राकेश पांडे उनके बेटे को सरकार के द्वारा तहसीलदार की नौकरी दिए जाने के सवाल पर भड़क गए और कैमरा बंद करवा दिया। जबकि गुरकीरत कोटली ने कहा कि उनके भाई को पहले ही सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और उसके पीछे कोई नियम नहीं तोड़ा गया बल्कि उनके दादा बेअंत सिंह आतंकी हमले में शहीद हुए थे और उसी आधार पर उनके भाई को सरकारी नौकरी डीएसपी के पद पर दी गई, उनके बेटे को नौकरी देने जैसी कोई भी बात नहीं है और बेवजह ही उनका और उनके परिवार का नाम इस मामले में घसीटा जा रहा है।

आम आदमी पार्टी ने ये आरोप लगाया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2017 विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान जनता से वादा किया था कि घर-घर नौकरी दी जाएगी लेकिन अब मोटी सरकारी नौकरियां वो सिर्फ अपने ही विधायकों को खुश करने के लिए दे रहे हैं। आम आदमी पार्टी के विधायकों और पंजाब यूथ विंग की अध्यक्ष अनमोल गगन मान ने चंडीगढ़ स्थित पंजाब सीएम हाउस के बाहर इसी बात को लेकर प्रदर्शन किया और सरकार से सवाल किया कि नियमों को ताक पर रखकर किस तरह से अपनी ही पार्टी के ऐसे विधायक जोकि कैप्टन अमरिंदर सिंह से खुश नहीं है उन्हें खुश करने के लिए सरकारी नौकरियां बांटी जा रही है।

इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस ने आम आदमी पार्टी के नेताओं को पंजाब सीएम हाउस जाने से रोक दिया और बैरिकेड्स लगा दिए। जिसके बाद आम आदमी पार्टी के नेता बैरिकेट्स पर ही काफी देर हंगामा करते रहे और बाद में इन नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।

वहीं इस पूरे मामले पर अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि कांग्रेस को लगता है कि अब पंजाब सरकार में उनके सिर्फ 6 महीने के आस-पास ही बचे हैं ऐसे में वो पूरी तरह से पंजाब को लूटने में लगे हैं और जो नौकरियां उन्हें देनी चाहिए थी आम लोगों को लेकिन नियमों को ताक पर रखकर अपने ही विधायकों के परिवारों को सरकारी नौकरियां देने में कांग्रेस सरकार लगी है। सुखबीर बादल ने कहा कि जिस फतेहजंग बाजवा के पिता को आतंकवाद के दौर का शहीद बताते हुए उनके परिवार में सरकारी नौकरी देने की बात की जा रही है वो दरअसल गैंगवार में मारा गया था जबकि कांग्रेसी उसे आतंकवाद के दौर में मारा गया शहीद बताकर इस तरह से सरकारी नौकरी का फायदा देने में लगे हैं।

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